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13th November | Current Affairs | MB Books


1. भारत ने ब्रिक्स स्वास्थ्य मंत्रियों के सम्मेलन में भाग लिया

भारत ने वर्चुअली 10वें ब्रिक्स स्वास्थ्य मंत्रियों के सम्मेलन में भाग लिया । केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री हर्षवर्धन ने भारतीय पक्ष की ओर से बैठक में भाग लिया। इस बैठक को संबोधित करते हुए, मंत्री ने COVID-19 के लिए भारत की प्रतिक्रिया रणनीति पर प्रकाश डाला। उन्होंने भारत द्वारा आरोग्य सेतु एप्प, Aarogya Setu App, ITIHAS प्रणाली आदि जैसी महामारी से लड़ने के लिए तकनीकी नवाचारों पर प्रकाश डाला।

9वें ब्रिक्स स्वास्थ्य मंत्रियों का सम्मेलन कूर्टिबा, ब्राजील में आयोजित किया गया था।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन

ब्रिक्स 2020 शिखर सम्मेलन 17 नवंबर, 2020 को COVID-19 के कारण वर्चुअली आयोजित किया जायेगा। रूसइस शिखर सम्मेलन के 12वें संस्करण का मेजबान होगा मूल रूप से, ब्रिक्स 2020 शिखर सम्मेलन 21 से 23 जुलाई, 2020 तक सेंट पीटर्सबर्ग में आयोजित किया जाना था लेकिन महामारी के कारण इसे स्थगित कर दिया गया था।

ब्रिक्स शेरपाओं की पहली बैठक रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में 11-13 फरवरी को हुई थी।

रूस ने 21-24 अक्टूबर, 2020 तक कज़ान में 5वें ब्रिक्स यंग डिप्लोमेट्स फोरम की मेजबानी भी की।

हाल ही में, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रथम ब्रिक्स वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नर्स (FMCBG) के सम्मेलन मेंभाग लिया और न्यू डेवलपमेंट बैंक की सदस्यता के विस्तार का भी समर्थन किया।

13-14 नवंबर, 2019 को ब्राजील के विदेश मंत्रालय के मुख्यालय में11वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन किया गया था।

पहली ब्रिक्स बैठक 16 जून, 2009 को येकातेरिनबर्ग, रूस में आयोजित की गई थी। इस बैठक में दक्षिण अफ्रीका शामिल नहीं था क्योंकि यह 2010 में समूह में शामिल हुआ था।

ब्रिक्स देशों के बीच राजनीतिक संवाद वास्तव में सितंबर 2006 में सभी चार देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के साथ न्यूयॉर्क में शुरू हुआ था।

ब्रिक्स

ब्रिक्स 5 राष्ट्रों- ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका का एक समूह है। यह एक संगठन के रूप में काम नहीं करता है, यह बस सदस्यों के बीच आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए एक साथ काम करने वाले देशों का एक समूह है, यह अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में संभावित जोखिमों को कम करता है, राजनीतिक और सुरक्षा के क्षेत्रों में सहयोग पर काम करता है। ब्रिक्स राष्ट्रों ने 2014 में न्यू डेवलपमेंट बैंक के रूप में जाना जाने वाले एक विकास बैंक का गठन किया है। इसे पहले ब्रिक्स विकास बैंक के रूप में जाना जाता था।


2. विश्व में सबसे लम्बे समय तक प्रधानमंत्री के रूप में कार्य करने वाले बहरीन के खलीफा बिन सलमान अल खलीफा का निधन

विश्व में सबसे लम्बे समय तक प्रधानमंत्री के रूप में कार्य करने वाले बहरीन के खलीफा बिन सलमान अल खलीफा का निधन 11 नवंबर को हुआ। वह 84 वर्ष के थे। अमेरिका के मेयो क्लिनिक अस्पताल में उनका निधन हुआ। वह 19 जनवरी 1970 को बहरीन के प्रधान मंत्री बने थे, लेकिन देश की आजादी के बाद 5 अगस्त 1971 को उन्होंने पदभार संभाला।

मुख्य बिंदु

खलीफा बिन सलमान अल खलीफा देश की राजनीति में एक प्रमुख व्यक्ति थे।

उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में देखा जाता है जिन्होंने आधुनिक अर्थव्यवस्था को फलने-फूलने में मदद की।हालाँकि, उन पर देश में 2011 में अरब स्प्रिंग विरोध प्रदर्शनों का उत्पीड़न करने का भी आरोप लगाया गया था।

वह अपने धन के लिए भी प्रसिद्ध थे।उनका अपना द्वीप था जहाँ वे विदेशी गणमान्य लोगों से मिलते थे।

बहरीन की रॉयल कोर्ट ने उनकी मृत्यु पर एक सप्ताह के लिए आधिकारिक शोक की घोषणा की है।

खलीफा बिन सलमान अल खलीफा द्वारा जीते गये पुरस्कार और सम्मान

बहरीन के पीएम ने सतत विकास के वैश्विक लक्ष्य को मजबूत करने के लिए संयुक्त राष्ट्र का शीर्ष सम्मान हासिल किया था।

वह 2017 में विश्व शांति संस्कृति पुरस्कार के विजेता भी थे।

भारत-बहरीन संबंध

अक्टूबर 2020 में, बहरीन के लिए भारतीय राजदूत, पीयूष श्रीवास्तव और बहरीन के वित्त और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था मंत्री शेख सलमान बिन खलीफा अल खलीफा ने व्यापार और वित्तीय क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने के लिए चर्चा की थी।

नवंबर 2019 में, पीएम मोदी ने बहरीन का दौरा किया और दोनों देशों ने संस्कृति, अंतरिक्ष, RuPay कार्ड और अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन पर तीन समझौतों पर हस्ताक्षर किए।यह बहरीन में किसी भी भारतीय प्रधान मंत्री की पहली यात्रा थी।

अपनी यात्रा के दौरान, दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए, पीएम मोदी को “द किंग हमाद ऑर्डर ऑफ़ द रीनांसे” से भी सम्मानित किया गया।

2014 में, बहरीन के राजा ने भारत का दौरा किया और दोनों देशों ने 450 मिलियन अमेरिकी डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार और निवेश के लिए दो समझौतों पर हस्ताक्षर किए।

बहरीन के नए प्रधानमंत्री

बहरीन के शासक हमाद बिन ईसा अल-खलीफा ने क्राउन प्रिंस सलमान अल-खलीफा को देश का नया प्रधानमंत्री नामित किया है।


3. पीएम मोदी ने वियतनाम के पीएम के साथ भारत-आसियान शिखर सम्मेलन को संबोधित किया

12 नवंबर, 2020 को, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वियतनामी प्रधानमंत्री नेग्युआन ज़ुआन फुक के साथ भारत-आसियान शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता की। आसियान दक्षिण पूर्व एशियाई देशों का संघ है।

मुख्य बिंदु

इस शिखर सम्मेलन में भारत-आसियान रणनीतिक साझेदारी की स्थिति की समीक्षा की जाएगी। इसमें समुद्री सहयोग, कनेक्टिविटी, व्यापार और वाणिज्य, क्षमता निर्माण और शिक्षा जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाएगा। आसियान को एक प्रभावशाली समूह माना जाता है क्योंकि आसियान क्षेत्र में आगामी बाजारों के लिए उच्च क्षमता है। इस क्षेत्र में 2022 तक 5.2% की औसत से बढ़ने की उम्मीद है। यह 2030 तक दुनिया का सबसे बड़ा एकल बाजार बन जाएगा। इसलिए भारत, चीन, जापान और ऑस्ट्रेलिया एक दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं ताकि बाजार में अपनी जगह हासिल कर सकें।

दक्षिण चीन सागर में चीन के आक्रामक व्यवहार के बीच आसियान शिखर सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है।

भारत-आसियान

इस शिखर सम्मेलन के दौरान, भारत और आसियान “आसियान-भारत योजना (2021-2025)” को अपनाएंगे। आसियान के दस सदस्यों में इंडोनेशिया, फिलीपींस, मलेशिया, सिंगापुर, थाईलैंड, वियतनाम, ब्रुनेई, लाओस, कंबोडिया, म्यांमार शामिल हैं।

भारत के लिए आसियान क्यों महत्वपूर्ण है?

भारत को वायु, भूमि और पानी के माध्यम से आसियान देशों के साथ अपने व्यापार और कनेक्टिविटी का निर्माण करके पूर्वोत्तर क्षेत्र का विकास करना है। यह भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी का मुख्य केंद्र बिंदु है। आसियान के साथ अपने व्यापार को बेहतर बनाने के लिए भारत ने म्यांमार, थाईलैंड और वियतनाम जैसे देशों के साथ अपने संपर्क बढ़ाए हैं। भारत ने 1,400 किलोमीटर त्रिपक्षीय राजमार्ग बनाने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं जो भारत, म्यांमार और थाईलैंड को जोड़ेगा। कालादान मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट लागू किया जा रहा है। यह परियोजना मिज़ोरम राज्य के साथ सितवे पोर्ट को जोड़ेगी। नई दिल्ली और हनोई को जोड़ने की योजना पर भी विचार किया जा रहा है।

आसियान भारत का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। आसियान के साथ भारत का समग्र व्यापार देश के समग्र व्यापार का 10.6% है।


4. विश्व की सबसे पुरानी ‘द लिनियन सोसाइटी’ के फेलो बने एनबीआरआई के वैज्ञानिक

सीएसआईआर-राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (एनबीआरआई) लखनऊ के वैज्ञानिक डॉ. टी एस राणा को विज्ञान के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए लंदन की प्रतिष्ठित द लिनियन सोसाइटी का फेलो (एफएलएस) चुना गया है। उन्हें यह फेलोशिप प्लांट मॉलिक्यूलर सिस्टमेटिक्स और इवोल्यूशनरी बायोलॉजी के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए दी जा रही है। लिनियन सोसाइटी ऑफ लंदन की स्थापना वर्ष 1788 में हुई थी। इसकी स्थापना सर जेम्स एडवर्ड स्मिथ ने की थी। इसका नामकरण स्वीडन के प्रकृतिवादी वैज्ञानिक कार्ल लिनियस के नाम पर हुआ है। इसे दुनिया की सबसे पुरानी सक्रिय बायोलॉजिकल सोसाइटी होने का गौरव प्राप्त है। यह सोसाइटी जीव विज्ञानों के विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति और उन पर परिचर्चाओं का प्रमुख मंच है। इसी सोसाइटी ने चार्ल्स डार्विन और अल्फ्रेड रसेल वॉलेस के अनुकूलता के सिद्धांत का सर्वप्रथम प्रकाशन किया था। कई वैज्ञानिक, प्रकृतिवादी, इतिहासकार, कला जगत से जुड़े और प्राकृतिक संसार में रुचि रखने वाले लोग इस सोसाइटी से जुड़े हुए हैं। इस सोसाइटी की गतिविधियां संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को पूरा करने की दिशा में भी योगदान दे रही हैं। डॉ. टी.एस. राणा पादप आणुविक वर्गिकी और मानव कल्याण के लिए औषधीय पादप संसाधनों के जैव-पूर्वेक्षण (बायो-प्रोस्पेक्टिंग) के क्षेत्र में तीन दशकों से शोध में जुटे हैं। उन्होंने वर्ष 2002 में सीएसआईआर-एनबीआरआई, लखनऊ में ‘आणुविक पादप विज्ञान प्रयोगशाला’ की स्थापना की और संस्थान में पहली बार समकालीन आणुविक मार्करों का उपयोग कर पौधों पर शोध कार्य शुरू किया। जैव विविधता मूल्यांकन, पादप आणुविक वर्गिकी, डीएनए फिंगरप्रिंटिंग और औषधीय पौधों की जैव-पूर्वेक्षण के क्षेत्र में डॉ. राणा के योगदान को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त है। उनके 100 से अधिक शोध पत्र और 3 पुस्तकें भी प्रकाशित हो चुकी हैं। ‘प्लांट टैक्सोनॉमी एंड बायोसिस्टमैटिक्स: क्लासिकल एंड मॉडर्न मेथड्स’ (2014) पुस्तक में

पादप वर्गिकी की पारंपरिक और आधुनिक अवधारणाओं की विविधता के बारे में समग्र जानकारी उपलब्ध है। इस पुस्तक को भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी पादप विज्ञान के शोधकर्ताओं द्वारा संदर्भ के रूप में प्रयोग किया जाता है। डॉ. राणा द लिनियन सोसाइटी-लंदन के साथ ही साथ इंडियन बॉटनिकल सोसाइटी, इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ एनवायर्नमेंटल बॉटनिस्ट और उत्तर प्रदेश एकेडमी ऑफ साइंसेज आदि जैसे कई प्रतिष्ठित वैज्ञानिक निकायों के सदस्य भी हैं। डॉ. राणा को वनस्पति विज्ञान के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए वर्ष 2002 में भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय स्थित विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा द्वारा प्रतिष्ठित बॉयजकास्ट-BOYSCAST फैलोशिप से सम्मानित किया जा चुका है।

5. भारतीय-अमेरिकी काश पटेल बने कार्यवाहक अमेरिकी रक्षा सचिव के चीफ ऑफ स्टाफ

10 नवंबर, 2020 को पेंटागन द्वारा साझा की गई एक खबर के अनुसार, एक भारतीय-अमेरिकी, काश पटेल को चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ (मुख्य सचिव) के तौर पर नामित किया गया है उन्हें कार्यवाहक अमेरिकी रक्षा सचिव, क्रिस मिलर द्वारा इस पद के लिए नामित किया गया था

पेंटागन से काश पटेल की यह नई नियुक्ति, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा रक्षा सचिव मार्क ऐस्पर को निकाल दिए जाने के एक दिन बाद हुई है और नेशनल काउंटर-टेररिज्म सेंटर के निदेशक, क्रिस मिलर को संयुक्त राज्य अमेरिका के कार्यवाहक रक्षा सचिव के तौर पर नियुक्त किया गया है मिलर ने 09 नवंबर, 2020 को अपनी इस नई भूमिका की जिम्मेदारी और कार्यभार संभाला

काश पटेल ने जेन स्टीवर्ट का स्थान लिया है, जिन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है खुफिया एवं सुरक्षा कार्यवाहक अवर रक्षा सचिव जोसेफ कर्नन और रक्षा नीति के अवर सचिव डॉ. जेम्स एंडरसन ने भी अपने इस्तीफे दे दिए हैं

काश पटेल: राजनीतिक जीवन की मुख्य विशेषताएं

न्यूयॉर्क में लॉ स्कूल से अपनी पढ़ाई समाप्त करने के बाद, वे फ्लोरिडा गए जहां उन्होंने चार साल के लिए स्टेट पब्लिक डिफेंडर के तौर पर काम किया और एक बार फिर, चार साल के लिए फेडरल पब्लिक डिफेंडर के तौर पर काम किया

काश पटेल फ्लोरिडा से वाशिंगटन डीसी में न्याय विभाग में आतंकवाद अभियोजक के तौर पर काम करने लगे उन्होंने साढ़े तीन साल तक अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद अभियोजक के तौर पर काम किया

जबकि अभी भी वे न्याय विभाग में काम कर रहे थे, वे एक नागरिक के तौर पर रक्षा विभाग में विशेष संचालन कमान में शामिल हो गए

पेंटागन में, वे विशेष बलों के लोगों के लिए न्याय विभाग के वकील के तौर पर भी काम करते रहे उन्होंने विश्व स्तर पर इंटर-एजेंसी कोलैबोरेटिव टार्गेटिंग ऑपरेशन्स के प्रतिनिधि तौर पर भी काम किया

जून 2019 में, उन्हें व्हाइट हाउस में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के वरिष्ठ निदेशक के आतंकवाद प्रतिरोध निदेशालय में नियुक्त किया गया था

काश पटेल के बारे में निजी जानकारी

कश्यप प्रमोद पटेल, जिन्हें काश पटेल के तौर पर भी जाना जाता है, 39 साल के हैं और वे न्यूयॉर्क में पैदा हुए थे, लेकिन गुजरात में उनकी जड़ें हैं हालांकि, उनके माता-पिता पूर्वी अफ्रीका से हैं, उनके पिता युगांडा से हैं, और उनकी मां तंजानिया से हैं वे लोग वर्ष 1970 में कनाडा से संयुक्त राज्य अमेरिका आए और न्यूयॉर्क के क्वींस शहर में बस गए


6. इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक ने डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र जमा करने के लिए डोरस्टेप सेवा शुरू की

इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक, IPPB ने डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट जमा करने के लिए डोरस्टेप सेवा की पहल सफलतापूर्वक शुरू की है।जीवन प्रमाण पोर्टल के माध्यम से जीवन प्रमाणपत्र ऑनलाइन जमा करने की सुविधा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नवंबर, 2014 में शुरू की गई थी ताकि जीवन प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने के लिए पेंशनरों को सुविधाजनक और पारदर्शी सुविधा प्रदान की जा सके।

मुख्य बिंदु

देश भर में यह सुविधा उपलब्ध कराने के लिए, पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग ने इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक में पोस्टमैन और ग्रामीण डाक सेवकों के विशाल नेटवर्क का उपयोग करने के लिए पेंशनरों को जीवन प्रमाण पत्र जमा करने के लिए डिजिटल रूप से सुविधा प्रदान की है।

इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक

इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक का गठन कम्पनीज एक्ट, 2013 के अंतर्गत 17 अगस्त, 2016 को किया गया था। यह एक पब्लिक लिमिटेड कंपनी है जो डाक विभाग के अधीन है। यह एयरटेल और पेटीएम के बाद पेमेंट्स बैंक का परमिट करने वाली तीसरी कंपनी थी।

इसमें ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 11,000 ग्रामीण सेवक और शहरी क्षेत्रों में पोस्टमैन लोगों को बैंकिंग सेवाएं प्रदान करेंगे। इसके अलावा इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक को 17 करोड़ पोस्टल बचत बैंक खातों को को लिंक करने की अनुमति भी दी गयी है। इस पेमेंट्स बैंक से RTGS, NEFT, IMPS इत्यादि हस्तांतरण किये जा सकते हैं, इससे इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक के ग्राहक किसी भी बैंक खाते से पैसे प्राप्त कर सकते हैं व भेज सकते हैं। इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक ऋण प्रदान नहीं कर सकता। यह एटीएम व डेबिट कार्ड जारी कर सकता है परन्तु क्रेडिट कार्ड जारी नहीं कर सकता।


7. रोजगार को बढ़ावा देने के लिए आत्मनिर्भर भारत रोज़गार योजना लॉन्च की गई

12 नवंबर, 2020 को, वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने चौथे आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा की। इस घोषणा के दौरान, वित्त मंत्री ने “आत्मनिर्भर भारत रोज़गार योजना” लांच की।

आत्मनिर्भर भारत रोज़गार योजना

COVID-19 रिकवरी चरण के दौरान नए रोजगार के अवसरों को प्रोत्साहित करने के लिए आत्मनिर्भर भारत रोज़गार योजना शुरू की गई है। इस योजना के लाभार्थियों में ईपीएफओ पंजीकृत प्रतिष्ठानों के कर्मचारी शामिल हैं, जो 15,000 रुपये से कम मासिक वेतन पर कार्यरत्त थे।

लाभार्थी

आत्मनिर्भर भारत रोज़गार योजना EPFO ​​पंजीकृत संगठनों के नए कर्मचारियों और 1 मार्च, 2020 और 30 सितंबर, 2020 के बीच नौकरी गंवाने वाले नए कर्मचारियों को लाभान्वित करेगी।

योजना की मुख्य विशेषताएं

आत्मनिर्भर भारत रोज़गार योजना के तहत केंद्र दो साल के लिए सब्सिडी प्रदान करेगा।

10,000 कर्मचारियों को रोजगार देने वाले प्रतिष्ठानों के लिए, भारत सरकार कर्मचारियों के योगदान (वेतन का 12%) और नियोक्ता के योगदान (वेतन का 12%) प्रदान करेगी।

ईपीएफ योजना क्या है?

रोजगार भविष्य योजना कर्मचारी (Employment Provident Scheme) भविष्य निधि संगठन द्वारा चलाई जाती है। इसमें 20 से अधिक लोगों को रोजगार देने वाले सभी प्रतिष्ठान शामिल हैं। इस योजना के तहत, कर्मचारी को योजना के लिए एक निश्चित योगदान देना होता है। समान योगदान का भुगतान नियोक्ता द्वारा भी किया जाता। कर्मचारी की सेवानिवृत्ति के दौरान, दोनों पर ब्याज के साथ एकमुश्त राशि कर्मचारी को दी जाती है।

आत्म निर्भर भारत अभियान में, भारत सरकार ने घोषणा की थी कि वह कर्मचारी और नियोक्ता दोनों के योगदान का भुगतान करेगी।

अन्य घोषणाएं

वित्त मंत्री ने यह भी घोषणा की कि पीएलआई योजना को 10 अन्य क्षेत्रों में बढ़ाया जा रहा है। पीएम आवास योजना के लिए 18,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त परिव्यय घोषित किया गया है। भारतीय COVID-19 वैक्सीन विकास के अनुसंधान और विकास के लिए 900 करोड़ रुपये आवंटित किये गये हैं।


8. मूडीज ने 2020 के लिए भारत की जीडीपी में 8.9% संकुचन का अनुमान लगाया

क्रेडिट रेटिंग एजेंसी, मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के पूर्वानुमान को संशोधित करते हुए कैलेंडर वर्ष 2020 के लिए -8.9 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है, इससे पहले का पूर्वानुमान -9.6 प्रतिशत था। एजेंसी ने सितंबर 2020 में अनुमान लगाया था कि भारत की जीडीपी में 9.6% का संकुचन होगा।

मुख्य बिंदु

भारत के लिए कैलेंडर वर्ष 2021 का जीडीपी पूर्वानुमान भी 8.1 प्रतिशत से संशोधित करके अब 8.6 प्रतिशत कर दिया गया है।भारतीय अर्थव्यवस्था ने अप्रैल-जून तिमाही में लगभग 23.9% का संकुचन हुआ था। यह देशव्यापी लॉकडाउन के प्रभाव के कारण हुआ था।

इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भू-राजनीतिक और व्यापार जोखिम अगले वर्ष में प्रमुख फोकस रहेंगे क्योंकि दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं, अमेरिका और चीन के बीच संबंध काफी खराब हो गए थे।

साथ ही, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अनुसार, जुलाई-सितंबर की अवधि के लिए भारत की जीडीपी के 6% तक संकुचित होने की उम्मीद है।

मूडीज

मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस मूडीज कॉर्पोरेशन की क्रेडिट रेटिंग एजेंसी है। मूडीज सबसे बड़ी क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों में से एक है, जो सरकार और वाणिज्यिक संस्थाओं द्वारा जारी किए गए बॉन्ड पर अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय शोध प्रदान करती है। यह स्टॉक, बॉन्ड और बॉन्ड रेटिंग से संबंधित डेटा के मैनुअल के उत्पादन के लिए 1909 में जॉन मूडी द्वारा शुरू की गयी थी। अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग ने 1975 में राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सांख्यिकीय रेटिंग संगठन (NRSRO) के रूप में कंपनी को चिन्हित किया। इसके बाद, मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस वर्ष 2000 में एक अलग कंपनी बन गई और मूडीज कॉर्पोरेशन को होल्डिंग कंपनी के रूप में स्थापित किया गया।


9. सितंबर में आईआईपी अगस्त में -8% से 0.2 प्रतिशत तक पहुंचा

सितंबर महीने में देश का औद्योगिक उत्पादन (आईआईपी) अगस्त में -8% से बढ़कर 0.2 प्रतिशत हो गया है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा आज जारी आंकड़ों के अनुसार, विनिर्माण क्षेत्र ने सितंबर में 0.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की, जबकि खनन का उत्पादन 1.4 प्रतिशत बढ़ा और उर्जा क्षेत्र में 4.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

पिछले साल सितंबर में आईआईपी में 4.6 प्रतिशत का संकुचन हुआ था। दूसरी ओर, खुदरा मुद्रास्फीति (CPI) अक्टूबर में 7.61 प्रतिशत तक बढ़ी। यह नौ महीने का उच्चतम स्तर है।

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक के द्वारा लघु काल में कुछ एक निश्चित औद्योगिक उत्पादों के उत्पादन में होने वाले परिवर्तन को दर्शाता है। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक का प्रकाशन केन्द्रीय सांख्यिकीय संगठन द्वारा प्रति माह किया जाता है।

सीएसओ ने आईआईपी के आधार वर्ष को मई 2017 में 2004-05 से 2011-12 में संशोधित किया था ताकि अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक परिवर्तनों को हासिल किया जा सके और गुणवत्ता सूचकांकों को बेहतर बनाया जा सके।

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में कुल 407 वस्तु समूह शामिल किये गए हैं, इसमें वस्तुओं को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है: विनिर्माण क्षेत्र में 405 वस्तुएं, उत्खनन और विद्युत में एक-एक वस्तु को शामिल किया गया है। इन तीनो वस्तु समूहों का भार 77.63%, 14.37% तथा 7.9% है।

केन्द्रीय सांख्यिकीय संगठन

सांख्यिकीय गतिविधियों के समन्वय एवं सांख्यिकीय मानकों के विकास एवं अनुरक्षण हेतु यह भारत का उत्तरदायी संगठन है। इस संगठन का मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है। केन्द्रीय सांख्यिकीय संगठन सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत्त कार्य करता है।


10. IFSC ने Capital Market पर IFSCA को रिपोर्ट प्रस्तुत की

IFSC इंटरनेशनल रिटेल बिजनेस डेवलपमेंट कमेटी ने अपनी अंतिम रिपोर्ट IFSCA को 11 नवंबर को प्रस्तुत की है। अंतिम रिपोर्ट में कैपिटल मार्केट्स की सिफारिशें हैं। इस समिति ने IFSC के विकास के लिए सिफारिशें भी कीं। इससे पहले, समिति ने बीमा और बैंकिंग पर दो अंतरिम रिपोर्ट प्रस्तुत की है।

इस IFSC इंटरनेशनल रिटेल बिजनेस डेवलपमेंट कमेटी को 3 अगस्त, 2020 को अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण (IFSCA) द्वारा नियुक्त किया गया था। प्राधिकरण ने समिति को 3 महीने में अपनी रिपोर्ट देने के लिए कहा था।

रिपोर्ट की मुख्य सिफारिशें

बैंकिंग

एलआरएस निवेश सहित भारतीयों को रिटेल भागीदारी की अनुमति दें और खुदरा / व्यक्तिगत ग्राहकों को बैंकिंग उत्पाद और समाधान प्रदान करने के लिए IFSC बैंकिंग इकाइयों (IBUs) को सक्षम करें।

विभिन्न बाजारों में निवेश की अनुमति देकर IBU में धन प्रबंधन क्षमताओं को सक्षम किया जाना चाहिए।

एफएफआई (विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक) लाइसेंस प्राप्त करने के लिए IFSC बैंकिंग इकाइयों को अनुमति दी जनि चाहिए।

शिपमेंट के अलावा विदेशी मुद्रा में प्री-शिपमेंट के लिए भारतीय निर्यातकों को वित्त देने के लिए आईबीयू को अनुमति दी जानी चाहिए।

तरलता अनुपात बनाए रखने की आवश्यकता को दूर किया जाना चाहिए।

बीमा

भारतीय मूल (पीआईओ) / अनिवासी भारतीयों को आईएफएससी में स्थापित कंपनियों से जीवन बीमा पॉलिसी खरीदने के लिए और उन्हें किसी भी मुद्रा में प्रीमियम का भुगतान करने की अनुमति दी जानी चाहिए।

भारत में स्थित अपने परिवार के सदस्यों को कवर करने वाले पीआईओ / एनआरआई को स्वास्थ्य बीमा उत्पादों की पेशकश के लिए बीमा कंपनियों को अनुमति दी जानी चाहिए।

कारोबार को बढ़ावा देने के लिए बीमा कंपनियों को IFSC में सहायक कंपनियों को स्थापित करने की अनुमति दी जानी चाहिए।

एसेट मैनेजमेंट और कैपिटल मार्केट्स

एलआरएस मार्ग के माध्यम से आईएफएससी में म्युचुअल फंड (एमएफ) या वैकल्पिक निवेश फंड (एआईएफ) में निवेश के लिए निवासी व्यक्तियों को अनुमति दी जानी चाहिए।

एलआरएस मार्ग के माध्यम से आईएफएससी एक्सचेंजों में सूचीबद्ध कंपनियों में निवेश के लिए निवासी व्यक्तियों को अनुमति दी जानी चाहिए।

भारतीय या विदेशी जारीकर्ताओं को IFSC में ऋण या इक्विटी बढ़ाने की अनुमति देने के लिए एक ढांचा विकसित किया जाना चाहिए।

बैंकों की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनियों को एक अलग कंपनी स्थापित किए बिना क्लियरिंग / ट्रेडिंग सदस्यों के रूप में काम करने की अनुमति दी जानी चाहिए।

IFSC फंड मैनेजरों के लिए सरल और व्यावहारिक अलग सुरक्षित बंदरगाह प्रणाली लागू की जानी चाहिए।

IFSC में USD और अन्य विदेशी मुद्रा सेटलमेंट के लिए भुगतान प्रणाली विकसित की जानी चाहिए।

IFSC में सभी वित्तीय सेवाओं को विनियमित करने के लिए भारत सरकार द्वारा अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण शुरू किया गया था। इनजेटी श्रीनिवास IFSCA के अध्यक्ष हैं।


11. मध्यप्रदेश ने लांच किया ‘Roadmap to Aatma Nirbhar Madhya Pradesh’

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 12 नवंबर को एक वर्चुअल कार्यक्रम के माध्यम से “आत्म निर्भर मध्य प्रदेश 2023” का रोडमैप लॉन्च किया। इस रोडमैप के तहत राज्य में स्वास्थ्य और शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

मुख्य बिंदु

स्वास्थ्य क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करते हुए राज्य में अस्पतालों का एक नेटवर्क स्थापित किया जाएगा।

अर्थव्यवस्था और रोजगार भी प्रमुख फोकस क्षेत्र होंगे और लघु व कुटीर उद्योग को प्रोत्साहन दिया जायेगा।

राज्य के रोडमैप को तैयार करने के लिए भौतिक बुनियादी ढांचे, सुशासन, स्वास्थ्य और शिक्षा पर चार सेमिनार आयोजित किए गए।सेमिनार में विशेषज्ञों से प्राप्त इनपुट के आधार पर, आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश का रोडमैप तैयार किया गया है।

मुख्य ग्रामीण स्ट्रीट वेंडर योजना

आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश का रोडमैप लांच करने के साथ ही मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री ग्रामीण ग्रामीण सड़क ऋण योजना के तहत ग्रामीण सड़क विक्रेताओं के खातों में 10 हजार रुपये का ब्याज मुक्त ऋण भी हस्तांतरित किया।

ग्रामीण क्षेत्रों में स्ट्रीट वेंडर्स को 10,000 रुपये तक का ऋण प्रदान करने के लिए राज्य सरकार द्वारा यह योजना शुरू की गई थी।

इस योजना के तहत, राज्य सरकार प्रति ऋण लाभार्थी (10,000 रुपये तक के ऋण के लिए) पर 14% ब्याज अनुदान वहन करेगी।

आत्मनिर्भर भारत

यह भारत को “आत्मनिर्भर” बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक विज़न है। इस शब्द का पहली बार इस्तेमाल पीएम ने 12 मई, 2020 को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में किया था, जहां उन्होंने लोगों से “वोकल फॉर लोकल” होने की अपील की थी। तब से इस मिशन के तहत विभिन्न पहलें की जा रही हैं जैसे कि पीपीई किट का निर्माण, रिलायंस जियो द्वारा मेड इन इंडिया 5जी नेटवर्क की घोषणा, 101 रक्षा वस्तुओं पर आयात पर प्रतिबन्ध इत्यादि। आईआईटी एलुमनी काउंसिल ने इस मिशन का समर्थन करने के लिए 21,000 करोड़ रुपये का फंड भी स्थापित किया है।


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