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2nd December | Current Affairs | MB Books


1. वैज्ञानिकों ने बनाया दुनिया का सबसे छोटा मेमोरी डिवाइस

शोधकर्ताओं ने दुनिया का सबसे छोटा मेमोरी डिवाइस बना लिया है। इस विकास से कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और ब्रेन-इंस्पायर्ड कंप्यूटिंग के लिए तेज, छोटे और अधिक ऊर्जा-कुशल इलेक्ट्रॉनिक चिप्स का निर्माण हो सकता है।

शोधकर्ताओं ने उस पदार्थ विज्ञान को भी खोज लिया है जो इन छोटे उपकरणों के लिए गहन मेमोरी स्टोरेज क्षमताओं को अनलॉक करता है। इस शोध को हाल ही में 'नेचर नैनो टेक्नोलॉजी' नामक जर्नल में प्रकाशित किया गया था। इसके शोधकर्ता टेक्सास विश्वविद्यालय, ऑस्टिन के हैं।

मुख्य विशेषताएं

वैज्ञानिकों ने क्रॉस-सेक्शन क्षेत्र को केवल एक वर्ग नैनोमीटर तक सिकोड़कर सबसे छोटे और पतले मेमोरी स्टोरेज डिवाइस का आकार कम कर दिया है।

शोधकर्ताओं के अनुसार, इन उपकरणों में अधिकतम मेमोरी स्टोरेज क्षमता को पैक करने वाले पदार्थ विज्ञान को खोजने पर, वे इस डिवाइस को बहुत छोटा और पतला बनाने में सक्षम हो गये हैं।

उन्होंने कहा कि उच्च-घनत्व मेमोरी स्टोरेज क्षमता को तैयार करने में इस पदार्थ में मौजूद अल्ट्रास्मॉल छिद्रों ने मदद की है।

शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में प्राथमिक नैनोमेट्री के तौर पर कंपाउंड मोलिब्डेनम डीसल्फ़ाइड का उपयोग किया, जिसे MoS2 के तौर पर भी जाना जाता है।

उनका यह मानना ​​है कि, यह खोज सैकड़ों संबंधित पतले परमाणु मैटेरियल्स पर भी लागू हो सकती है।

लाभ

शोधकर्ताओं ने यह कहा है कि, छोटे प्रोसेसर अधिक कॉम्पैक्ट कंप्यूटर और फोन बनाने में निर्माताओं को सक्षम बनाते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि, इन चिप्स के आकार को कम करने से इनकी ऊर्जा-मांग घट जाती है और कार्य क्षमता भी बढ़ जाती है।

इसका मतलब है कि, तेज़ और स्मार्ट डिवाइसेस संचालन के लिए कम ऊर्जा का उपयोग करते हैं।

पृष्ठभूमि

शोधकर्ताओं द्वारा "एटमरिस्टर" नामक यह मूल उपकरण, उस समय के सबसे पतले मेमोरी स्टोरेज डिवाइस के रूप में दर्ज किया गया था, जिसकी मोटाई सिर्फ एकल परमाणु परत जितनी थी।


2. केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने "सहकार प्रज्ञा" पहल का किया शुभारंभ

केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने हाल ही में सहकार प्रज्ञा नामक एक नई पहल का अनावरण किया है।

सहकार प्रज्ञा, भारत में प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से सहकारी क्षेत्र की क्षमता के विकास में मदद करने के लिए राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (National Cooperative Development Corporation) की एक पहल है।

इस पहल के तहत, किसानों के लिए 45 नए प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार किए गए हैं, जिनमे एनसीडीसी द्वारा देश के ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक सहकारी समितियों को प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।

प्रशिक्षण मॉड्यूल का उद्देश्य जानकारी और संगठनात्मक कौशल प्रदान करना है और देश भर में प्राथमिक सहकारी समितियों को तैयार करने का प्रयास करना है जो सरकार की आत्मनिर्भर भारत पहल में एक बड़ी भूमिका निभाने में सक्षम बन सके।


3. मेघालय में बिजली वितरण क्षेत्र के लिए एशियाई विकास बैंक (ADB) ने 132.8 मिलियन डॉलर के ऋण को मंजूरी दी

मेघालय में बिजली वितरण क्षेत्र के लिए एशियाई विकास बैंक (ADB) ने 132.8 मिलियन डॉलर के ऋण को मंजूरी दी है। में बिजली वितरण एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने राज्य में बिजली वितरण नेटवर्क में सुधार और उसे उन्नत बनाने के लिये 13.28 करोड़ डॉलर के कर्ज को मंजूरी दी है। यह वितरण प्रणाली और बिजली क्षेत्र की वित्तीय स्थिरता में सुधार के लिए मेघालय की पहल का समर्थन करेगा।

पृष्ठभूमि

अगस्त 2020 में मेघालय कैबिनेट ने 1,345.72 करोड़ रुपये का ऋण प्राप्त करने के लिए मेघालय ऊर्जा निगम लिमिटेड (MeECL) के एक प्रस्ताव को मंजूरी दी। इन ऋणों का उपयोग बिजली बकाया को खत्म करने में किया जाना था। कुल तकनीकी और वाणिज्यिक (एटीएंडसी) घाटे को कम करने के लिए एक शर्त पर ऋण प्रदान किया जाना था।

मुख्य बिंदु

इस कोष के द्वारा मेघालय विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (MePDCL) की वितरण प्रणाली और वित्तीय स्थिरता को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

इस ऋण के माध्यम से सेंट्रल पावर जनरेटिंग स्टेशनों और पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (PGILIL) से खरीदी गई बिजली की बकाया राशि को समाप्त करने में मद्दत मिलेगी ।

यह पुराने विद्युत मीटर को स्मार्ट मीटर से बदलेगी, जिससे लगभग 180,000 घरों को फायदा मिलेगा।

यह परियोजना मेघालय विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (MePDCL) के लिए एक वितरण क्षेत्र के रोड मैप और एक वित्तीय रोड मैप को तैयार करने में मदद करेगी।

यह रोड मैप वितरण नेटवर्क को संचालित और प्रबंधित करने के लिए MePDCL की क्षमता को मजबूत बनाएंगे।

तनावग्रस्त डिस्कॉम की सरकार ने कैसे मदद की है?

भारत सरकार ने अपनी अत्तार निर्भार भारत अभियान (एएनबीए) योजना के तहत स्ट्रेस्ड डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों (DISCOMS) को तरलता देने के लिए घोषणा की है। तरलता ऋण के रूप में प्रदान की जानी थी। इन ऋणों को राज्य सरकार द्वारा समर्थित किया जाना था। राज्य सरकार राज्य डिस्कॉम द्वारा पीढ़ी कंपनियों और ट्रांसमिशन कंपनियों की देनदारियों को साफ करने की गारंटी प्रदान करती है। इसके अलावा, ग्रामीण विद्युतीकरण निगम (आरईसी) और पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन ने भी एटक नर्बर भारत अभियान योजना के तहत विशेष लॉन्ग टर्म ट्रांजिशन लोन को 10 साल के लिए DISCOMs में बढ़ा दिया।


4. उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सूर्यधार झील का किया लोकार्पण

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने देहरादून के डोईवाला में सूर्यधार झील का लोकार्पण किया है।

सूर्यधार झील 550 मीटर लंबी, 28 मीटर चौड़ी और 10 मीटर गहरी है और जिसकी क्षमता 77,000 क्यूबिक मीटर है।

यह झील राज्य के 18-20 गांवों की पीने के पानी और सिंचाई की जरूरतों को पूरा करने के अलावा, इस क्षेत्र में जल संसाधनों को दुरुस्त करेगी और एक स्वस्थ इको-सिस्टम बनाने में मदद करेगी जो प्रवासी पक्षियों को आकर्षित करेगा।

इसके अलावा राज्य सरकार ने अगले साल मकर संक्रांति या बसंत पंचमी के दिन झील में एक वाटर स्पोर्ट्स फेस्टिवल का आयोजन करने की योजना भी तैयार की है।


5. बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज (BSE) में लखनऊ महानगर पालिका बॉण्‍ड को सूचीबद्ध करने की प्रक्रिया शुरू

लखनऊ नगर निगम के बॉन्ड पर निवेशकों को 8.5 फीसदी की दर से वार्षिक ब्याज मिलेगा और इसकी परिपक्वता अवधि 10 साल है। उत्‍तर प्रदेश सरकार के एक बयान के अनुसार पिछले महीने बॉण्‍ड जारी कर‍के लखनऊ महानगर पालिका ने दो सौ करोड़ रूपये प्राप्‍त किए हैं। लखनऊ नगर निगम के बॉन्ड की लॉन्चिंग के बाद यूपी सरकार वाराणसी, गाजियाबाद, आगरा और कानपुर के नगर निगम भी बांड लॉन्च करने की तैयारी कर रही है।

मुख्य बिंदु

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध होने से नगर निगम बॉंड की खरीद- फरोख्त सुनिश्चित हो सकेगी।

इस बॉन्ड के माध्यम से जुटाई गई धनराशि को राज्य की राजधानी में विभिन्न बुनियादी ढांचागत योजनाओं में निवेश किया जाएगा ।

लखनऊ म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (LMC) बॉन्ड जारी करने वाला उत्तर भारत का पहला नगर निगम बन गया है।

13 नवंबर को बीएसई बॉन्ड मंच के माध्यम से निजी नियोजन आधार पर नगरपालिका बॉन्ड जारी करके 200 करोड़ रुपये जुटाए थे।

इस प्रोत्साहन से नगर निगम पर ब्याज का बोझ भी 2% कम हो जाएगा। यह बांड नागरिक बुनियादी ढांचे को विकसित करने के लिए आवश्यक सहायता प्रदान करेगा।

म्युनिसिपल बांड

बॉन्ड एक तरह का लेटर ऑफ़ क्रेडिट होता है, जिसके मदत से आम लोगों या संस्थाओं से पैसे जुटाए जाते हैं। बॉन्ड जारी करने वाली संस्था एक निश्चित समय के लिए रकम उधार लेती है और निश्चित रिटर्न के साथ पैसे वापस करने की गारंटी देती है। ये इनवेस्टर्स के लिए फिक्स इनकम का साधन होता है. म्युनिसिपल या नगर निगम बॉन्ड जारी करती हैं।


6. सेनेगल को विश्व कप में जीत दिलाने वाले फुटबॉलर पापा बोउबा डोप का निधन

साल 2002 के फीफा विश्व कप मैच में देश को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाले सेनेगल के पेशेवर फुटबॉलर पापा बोउआ डोप (Papa Bouba Diop) का निधन।

वह 42 वर्ष की आयु के थे। उनके गोल ने सेनेगल को 2002 फीफा विश्व कप के उद्घाटन मैच में तत्कालीन विश्व चैंपियन फ्रांस पर 1-0 की जीत हासिल करने और फीफा विश्व कप में सेनेगल को पहला मैच जीतने में मदद की थी। डोप ने सेनेगल के लिए 63 कैप जीते थे।

7. DRDO ने दिल्ली कैंट के सरदार वल्लभभाई पटेल कोविड अस्पताल में ICU बेड बढ़ाये

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने 29 नवंबर, 2020 को घोषणा की है कि, इसने दिल्ली कैंट के सरदार वल्लभभाई पटेल अस्पताल में ICU बेड्स की संख्या बढ़ाकर 500 कर दी है। दिल्ली में कोविड - 19 के बढ़ते मामलों की संख्या को देखते हुए, केंद्र सरकार की सलाह पर यह कदम उठाया गया है।

ICU बेड्स की संख्या में वृद्धि के लिए वर्तमान में उपलब्ध ऑक्सीजन पाइपलाइनों और ICU मॉनिटर के अपग्रेडेशन जैसे अधिक अतिरिक्त उपकरणों की उपलब्धता की आवश्यकता थी। ICU वार्ड में सभी बेड्स को ऑक्सीजन सपोर्ट भी दिया गया है। DRDO द्वारा कोविड देखभाल अस्पताल को 5 जुलाई, 2020 को दिल्ली के साथ-साथ अन्य राज्यों के कोविड -19 रोगियों के इलाज के लिए एक जनादेश के तहत चालू किया गया था। इस अस्पताल में सभी आवश्यक उपकरणों के साथ DRDO की 1000 बिस्तर/ बेड्स की सुविधा मुहैया करवाई गई है।

COVID मामलों में वृद्धि से निपटने के लिए बढ़ाई गईं मेडिकल सुविधाएं

दिल्ली में कोविड -19 मामलों के अभूतपूर्व उछाल से निपटने के लिए, सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं ने कोविड देखभाल सुविधा में मेडिक्स की संख्या को बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसमें अब, CAPF और ITBP का नर्सिंग स्टाफ और डॉक्टर भी शामिल हुए हैं और चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं। DRDO की सुविधा में भर्ती मरीजों का इलाज दवाइयों, डायग्नोस्टिक्स और भोजन सहित मुफ्त किया जाता है।

इस अस्पताल में दिल्ली के साथ-साथ राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों से आने वाले रोगियों को भर्ती कराया गया है।

DRDO की कोविड देखभाल सुविधा में उपचारित मरीज

एक बयान के अनुसार, अब तक 3,271 कोविड रोगियों को कोविड देखभाल अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उनमें से 2,796 ठीक हो चुके हैं या उन्हें छुट्टी दे दी गई है। वर्तमान में, यहां 434 रोगियों का इलाज चल रहा है, जिसमें से 78 सेवा कर्मचारी और 356 नागरिक हैं।

जिन रोगियों का इलाज किया जा रहा है या जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है, उन्होंने अस्पताल में देखभाल और स्वास्थ्य सुविधाओं की प्रशंसा करते हुए अपनी संतुष्टि व्यक्त की है।


8. उत्पाल कुमार सिंह को नियुक्त किया गया लोकसभा का नया महासचिव