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29th September | Current Affairs | MB Books


1. चीन में अब ब्यूबोनिक प्लेग का खतरा

चीन में कोरोना वायरस के बाद अब ब्यूबोनिक प्लेग फैल गया है। इससे देश के दक्षिणी-पश्चिमी हिस्‍से में आपातकाल लगा दिया गया है। बताया जा रहा है कि एक तीन साल का बच्‍चा प्‍लेग की चपेट में आ गया है। यह बच्‍चा चीन के यून्‍नान प्रांत के मेंघाई काउंटी का रहने वाला है। चीन में 21 सितम्बर को प्‍लेग के फैलने का मामला सामने आया था।

इस घटना के बाद चीनी प्रशासन ने इलाके में चौथे स्‍तर का आपातकाल घोषित कर दिया है। प्रशासन की कोशिश है कि कोरोना वायरस की तरह से एक और महामारी न फैले इसके लिए यह आपातकाल घोषित किया गया है। इससे पहले यून्‍नान में ही प्‍लेग से संक्रमित तीन मरे हुए चूहे मिले थे। इससे पहले अगस्‍त महीने में उत्‍तरी मंगोलिया में प्‍लेग फैलने का मामला सामने आया था।

दुनिया अभी कोरोना वायरस (कोविड-19) के प्रकोप से मुक्त भी नहीं हो पाई है और चीन से एक और खतरे का अलर्ट जारी हो गया है। उत्तरी चीन के एक शहर में 05 जुलाई 2020 को ब्यूबोनिक प्लेग का संदिग्ध मामला सामने आया था। इसके बाद अलर्ट जारी किया गया है। इसे ब्लैक डेथ के नाम से भी जाना जाता है।

अब एक बार फिर चीन से एक खतरनाक और जानलेवा बीमारी फैलने का खतरा है। चीन के सरकारी पीपल्स डेली ऑनलाइन की एक रिपोर्ट के अनुसार आंतरिक मंगोलियाई स्वायत्त क्षेत्र, बयन्नुर शहर में ब्यूबोनिक प्लेग को लेकर 05 जुलाई को एक चेतावनी जारी की गई। बयन्नुर में ब्यूबोनिक प्लेग की रोकथाम और नियंत्रण के लिए लेवल थ्री की चेतावनी जारी की गई है।

ब्यूबोनिक प्लेग क्या है?

ब्यूबोनिक प्लेग एक अत्यधिक संक्रामक और घातक बीमारी है जो ज्यादातर रोडेंट्स (Rodents) से फैलता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के अनुसार यह बीमारी बैक्टीरिया यर्सिनिया पेस्टिस के कारण होती है, जो आम तौर पर छोटे स्तनधारियों और उनके पिस्सू में पाए जाने वाले एक जूनोटिक जीवाणु होते हैं। इसमें रोग के लक्षण एक से सात दिनों के बाद दिखाई देते हैं। यह बीमारी आमतौर पर पिस्सू के काटने से फैलती है जो चूहों, खरगोशों और गिलहरियों जैसे संक्रमित जीवों पर भोजन के लिए निर्भर करता है।

ब्यूबोनिक प्लेग के लक्षण

डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, ब्यूबोनिक प्लेग के लक्षणों में अचानक बुखार आना, ठंड लगना, सिर और शरीर में दर्द और कमजोरी, उल्टी और मतली जैसे लक्षण शामिल हैं। शरीर में एक या कई जगहों पर सूजन आ जाती है।

स्थानीय स्वास्थ्य विभाग ने जारी की चेतावनी

ब्यूबोनिक प्लेग का यह केस बयन्नुर के एक अस्पताल में 04 जुलाई 2020 को सामने आया. स्थानीय स्वास्थ्य विभाग ने यह चेतावनी 2020 के अंत तक के लिए जारी की है। यह बीमारी जंगली चूहों में पाए जाने वाली बैक्टीरिया से होती है। इस बैक्टीरिया का नाम यर्सिनिया पेस्टिस बैक्टीरियम है। यह बैक्टीरिया शरीर के लिंफ नोड्स, खून और फेफड़ों पर हमला करता है। इससे उंगलियां काली पड़कर सड़ने लगती है. नाक के साथ भी ऐसा ही होता है।

ब्यूबोनिक प्लेग कितना घातक है?

मध्य युग में ब्यूबोनिक प्लेग महामारी, जिसे 'ब्लैक डेथ' भी कहा जाता है। इसने यूरोप की आधी से अधिक आबादी का सफाया कर दिया था। हालांकि, एंटीबायोटिक दवाओं की उपलब्धता के साथ बीमारी का अब काफी हद तक इलाज हो सकता है।

यह बीमारी पहले भी आ चुका है

इस बीमारी ने पहले भी पूरी दुनिया में लाखों लोगों को मारा है। इस जानलेवा बीमारी का दुनिया में तीन बार हमला हो चुका है। यह बीमारी पहली बार 5 करोड़, दूसरी बार पूरे यूरो की एक तिहाई आबादी और तीसरी बार 80 हजार लोगों की जान ली थी। इस बीमारी को ब्लैक डेथ या काली मौत भी कहते हैं।

विश्वभर में ब्यूबोनिक प्लेग के साल 2010 से साल 2015 के बीच लगभग 3248 मामले सामने आ चुके हैं। जिनमें से 584 लोगों की मौत हो चुकी है। इन सालों में ज्यादातर मामले डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कॉन्गो, मैडागास्कर, पेरू में आए थे। इससे पहले साल 1970 से लेकर साल 1980 तक इस बीमारी को चीन, भारत, रूस, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और दक्षिण अमेरिकी देशों में पाया गया है।

ब्यूबोनिक प्लेग का दूसरा हमला दुनिया पर 1347 में हुआ था। तब इसे नाम दिया ब्लैक डेथ (Black Death) गया था। इस दौरान इसने यूरोप की एक तिहाई आबादी को खत्म कर दिया था। ब्यूबोनिक प्लेग का तीसरा हमला दुनिया पर 1894 के आसपास हुआ था। तब इसने लगभग 80 हजार लोगों को मारा था। इसका ज्यादातर असर हॉन्गकॉन्ग के आसपास देखने को मिला था। भारत में साल 1994 में पांच राज्यों में ब्यूबोनिक प्लेग के करीब 700 केस सामने आए थे।

2. रक्षा मंत्रालय ने 2,290 करोड़ रुपये के सैन्य उपकरणों की खरीद को मंजूरी दी

रक्षा मंत्रालय ने 2,290 करोड़ रुपये के हथियार एवं सैन्य उपकरणों की खरीद को मंजूरी दे दी है। इसमें अमेरिका से लगभग 72,000 सिग सॉअर असॉल्ट राइफलों की खरीद भी शामिल है। रक्षा मंत्रालय चीन के साथ एलएसी पर बढ़ते तनाव के बीच लगातार बड़े फैसले ले रहा है।

रक्षा खरीद संबंधी निर्णय लेने वाली रक्षा मंत्रालय की सर्वोच्च समिति रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) की बैठक में इन खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। रिपोर्ट के अनुसार, डीएसी ने जिन उपकरणों और हथियारों की खरीद को मंजूरी दी है उनमें राइफलों के अलावा वायुसेना एवं नौसेना के लिए करीब 970 करोड़ रुपये में एंटी-एयरफील्ड वेपन (एसएएडब्ल्यू) प्रणाली शामिल हैं।

रक्षा मंत्रालय ने क्या कहा?

रक्षा मंत्रालय ने कहा कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अगुवाई वाली डीएसी ने 2,290 करोड़ रुपये के हथियार एवं सैन्य उपकरणों की खरीद को मंजूरी दी। रिपोर्ट के अनुसार, सेना के अग्रिम मोर्चे पर तैनात सैनिकों के लिए सिग सॉअर राइफलों की खरीद 780 करोड़ रुपये में की जाएगी।

रक्षा मंत्री ने क्या कहा?

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि नई रक्षा खरीद प्रक्रिया में मेक इन इंडिया के तहत घरेलू रक्षा कंपनियों को ताकत देने की पूरी व्यवस्था की गई है जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के विजन के अनुरूप है। इसका मुख्य लक्ष्य भारत को रक्षा क्षेत्र में एक वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनना है।

मुख्य बिंदु

• नई खरीद प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करते हुए हथियारों और सैन्य साजो-समान को किराए (लीज) पर लेने का विकल्प खोल दिया गया है। इस बदलाव के बाद अब लड़ाकू हेलिकॉप्टर, मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, नौसैनिक जहाज से लेकर युद्धक साजो-समान को देश-विदेश कहीं से भी अनुबंध पर लेने का रास्ता खुल गया है।

• रक्षा मंत्री के अनुसार, रक्षा क्षेत्र की हाल में ही घोषित प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की नई नीति के मद्देनजर डीएपी-2020 में घरेलू कंपनियों को प्रोत्साहित करने का प्रावधान रखा गया है।

• रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, नये डीएपी के बाद युद्धक हेलिकॉप्टर और सैन्य उपकरण-हथियार, मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, नौसैनिक जहाज आदि किराए पर लिए जा सकेंगे।

• रक्षा खरीद परिषद ने 2290 करोड़ रुपये की के सैन्य साजो-सामान की खरीद को मंजूरी दे दी है। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई डीएसी की बैठक में सीमा के अग्रिम मोर्चे पर तैनात सैनिकों के लिए सिग सौर असाल्ट रायफल भी शामिल हैं।

रक्षा खरीद की नई प्रक्रिया एक अक्टूबर से लागू

रक्षा खरीद की नई प्रक्रिया एक अक्टूबर से लागू हो जाएगी। सीमित संसाधनों की चुनौती के बीच देश की रक्षा और सैन्य साजो-समान की भारी जरूरतों को देखते हुए अनुबंध के विकल्प को खरीद प्रक्रिया के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में शामिल किया गया है। राष्ट्रीय सुरक्षा के हितों से समझौता किए बिना पूंजीगत खर्च में कमी लाने के मकसद से हथियारों और सैन्य साजो-समान को लीज पर लिया जा सकेगा। अभी केवल रूस से नौसैनिक पनडुब्बी लीज पर लिए जाने के अपवाद के अलावा यह विकल्प नहीं था।

एसआईजी राइफल

बता दें कि पिछले साल फरवरी में हुई फास्ट ट्रैक खरीद के तहत भारतीय सेना को पहले ही 72,400 एसआईजी राइफल दी जा चुकी हैं। 7.62x51 मिमी कैलिबर वाली इन रायफल की प्रभावी मारक क्षमता 500 मीटर की है।

3. केंद्र सरकार ने NIA की इम्फाल, चेन्नई और रांची में नई शाखाएं खोलने की दी मंजूरी

गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी एनआईए की तीन अतिरिक्त शाखाओं को इम्फाल, चेन्नई और रांची में स्थापित करने की मंजूरी दे दी है। एनआईए के अनुसार, इस निर्णय से आतंकवाद रोधी जांच एजेंसी को संबंधित राज्यों में किसी भी उभरती हुई स्थिति को लेकर जल्दी प्रतिक्रिया देने में मदद मिलेगी।

यह फैसला एनआइए की आतंकवाद से संबंधित मामलों और अन्य राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी मुद्दों की जांच क्षमता को मजबूत करेगा। एनआईए की अतिरिक्त शाखाओं की स्थापना से एजेंसी आतंकवाद के खिलाफ लड़ने में पहले से अधिक सक्षम हो सकेगी। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने देश में एनआइए की तीन नई शाखाओं को स्वीकृति दी है।

एनआईए: एक नजर में

राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) भारत में आतंकवाद का मुकाबला करने हेतु भारत सरकार द्वारा स्थापित एक संघीय जाँच एजेंसी है। यह केन्द्रीय आतंकवाद विरोधी कानून प्रवर्तन एजेंसी के रूप में कार्य करती है। एजेंसी राज्यों से विशेष अनुमति के बिना राज्यों में आतंक संबंधी अपराधों से निपटने हेतु सशक्त है।

एनआईए का मुख्यालय दिल्ली में है। देश में इस समय इसकी नौ शाखाएं गुवाहाटी, मुंबई, जम्मू, कोलकाता, हैदराबाद, कोच्चि, लखनऊ, रायपुर और चंडीगढ़ में हैं। अब तीन और को मंजूरी दे दी गई है। इस एजेंसी को आतंकी गतिविधियों की जांच में विशेषज्ञता हासिल हैं। सरकार का मानना है कि नई शाखाओं से इन राज्यों में आतंकरोधी मोर्चे पर प्रभावी तरीके से काम करने, समय से सूचना हासिल करने और घटनाओं को रोकने में सहायता मिलेगी।

साल 2008 में मुंबई हमले के बाद आतंकवाद को समाप्त करने के लिए एनआईए का गठन किया गया था। यह जांच एजेंसी राज्यों से विशेष अनुमति के बिना राज्यों में आतंक संबंधी अपराधों से निपटने के लिए सशक्त है। इसके संस्थापक महानिदेशक राधा विनोद राजू थे जिनका कार्यकाल 31 जनवरी 2010 को समाप्त हुआ था। इन के पश्चात यह कार्यभार शरद चंद्र सिन्हा ने संभाला है।

आतंकी हमलों की घटनाओं, आतंकवाद को धन उपलब्ध कराने एवं अन्य आतंक संबंधित अपराधों का अन्वेषण के लिए एनआईए का गठन किया गया जबकि सीबीआई आतंकवाद को छोड़ भ्रष्टाचार, आर्थिक अपराधों एवं गंभीर तथा संगठित अपराधों का अन्वेषण करती है।

4. रक्षा मंत्री ने जारी की नई रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया

रक्षा मंत्री राज नाथ सिंह ने एक नई रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया, 2020 जारी की। इसमें भारतीय विक्रेताओं द्वारा डिजाइन और विकसित किए गए उत्पादों के लिए विशेष प्रोत्साहन है। इसके अलावा, इस प्रक्रिया में विनिर्माण श्रेणी शामिल है जो विदेशी निवेशकों और निर्माताओं को देश में विनिर्माण सुविधाएं स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करती है।

मुख्य बिंदु

रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (डीएपी), 2020 उस प्रक्रिया का स्थान लेगी जिसे 2016 में जारी किया गया था। 2020 रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), विशेष मिश्र और मेड इन इंडिया हाई एंड मटेरियल जैसे नए विचार शामिल है। इस प्रक्रिया के तहत, निम्नलिखित श्रेणियां विशेष रूप से भारतीय विक्रेताओं के लिए आरक्षित की जाएँगी :

बाय (इंडियन-आईडीडीएम)

मेक इन इंडिया I और II

डिजाइन और विकास में उत्पादन एजेंसी

आयुध निर्माणी बोर्ड और रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र की इकाई।

प्रमुख विशेषताऐं

विभिन्न श्रेणियों की स्वदेशी सामग्री में 10% की वृद्धि की गई है।यह मेक इन इंडिया पहल का समर्थन करने के लिए किया गया है।

Buy (Global – Manufacturing in India)नामक नई श्रेणी पेश की गई है। इस श्रेणी के तहत उत्पाद में कुल अनुबंध मूल्य के आधार पर न्यूनतम 50% स्वदेशी सामग्री होगी।

एक अन्य नई श्रेणी “लीजिंग” को पेश किया गया है।

मूल्य भिन्नता खंड पेश किया गया है।यह उन सभी मामलों पर लागू होता है जहां अनुबंध की कुल लागत 1,000 करोड़ रुपये से अधिक है।

साथ ही, यह नई प्रक्रिया एक दीर्घकालिक उत्पाद सहायता प्रदान करती है जो वारंटी अवधि पूरी होने के बाद तीन से पांच साल के बीच होगी।

रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया क्या है?

इसमें ऐसी प्रक्रियाएं शामिल हैं जिनका पालन रक्षा वस्तुओं की खरीद के दौरान सरकारी संस्थाओं द्वारा किया जाना चाहिए। यह रक्षा खरीद प्रक्रिया को आसान बनाने और आत्मनिर्भरता के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए तैयार की गयी है। इसके अलावा, इस प्रक्रिया का लक्ष्य स्वदेशी डिजाइन और रक्षा हथियारों के विनिर्माण को समयबद्ध तरीके से बढ़ावा देना है।

पहली रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2002 में प्रख्यापित की गई थी। तब से घरेलू उद्योगों को गति प्रदान करने और आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए इसे कई बार संशोधित किया गया है।

5. वरिष्ठ आईएएस अधिकारी पी.डी. वाघेला को TRAI का अध्यक्ष नियुक्त किया गया

वरिष्ठ आईएएस अधिकारी पी.डी. वाघेला को ट्राई (भारतीय दूरसंचार नियामक) के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया। उन्होंने आर.एस. शर्मा का स्थान लिया है।

पी.डी. वाघेला

वह गुजरात-कैडर के आईएएस अधिकारी हैं। वह वर्तमान में फार्मास्यूटिकल्स विभाग में है जो रसायन और उर्वरक मंत्रालय के तहत संचालित होता है। इससे पहले, वह गुजरात में वाणिज्यिक कर आयुक्त थे। उन्होंने जीएसटी, 2017 के रोल आउट में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

आर.एस. शर्मा

आमतौर पर ट्राई के अध्यक्ष को तीन साल के कार्यकाल के लिए नियुक्त किया जाता है। हालांकि, आर.एस. शर्मा को 30 सितम्बर, 2020 तक दो साल का कार्य विस्तार प्रदान किया गया था । ट्राई के अध्यक्ष से पहले, शर्मा ने आधार के निर्माण का नेतृत्व किया। वह 2009 और 2013 के बीच यूआईडीएआई (यूनीक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया) के निदेशक थे।

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण

यह 1997 के ट्राई अधिनियम के तहत स्थापित किया गया था। यह भारत में दूरसंचार उद्योग के विकास के लिए उपयुक्त वातावरण के लिए स्थापित किया गया था।

संरचना

इसका नेतृत्व एक अध्यक्ष द्वारा किया जाता है, इसमें दो पूर्णकालिक सदस्य और अधिकतम दो अंशकालिक सदस्य होते हैं। ये सभी सदस्य केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किए जाते हैं। सदस्यों को दूरसंचार उद्योग, लेखा, वित्त, कानून, प्रबंधन और उपभोक्ता मामलों में पेशेवर अनुभव होना चाहिए।

टीडीसैट (Telecom Dispute Settlement Appellate Tribunal)

दूरसंचार विवाद निपटान अपीलीय न्यायाधिकरण विवादों का निपटान करता है, यह सेवा प्रदाताओं के हितों की रक्षा करता है और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करता है। यह दूरसंचार सेवाओं को विनियमित करने में ट्राई के साथ कार्य करता है।

भारत में दूरसंचार क्षेत्र

भारत वर्तमान में 1.2 बिलियन पंजीकृत ग्राहकों के साथ दुनिया का सबसे बड़ा दूरसंचार बाजार है। यह आयकर के बाद भारत सरकार के लिए दूसरा सबसे बड़ा राजस्व का स्त्रोत है।

सरकारी उपाय

दूरसंचार क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए, भारत सरकार ने निम्नलिखित योजनाएं शुरू की हैं :

राष्ट्रीय डिजिटल संचार नीति, 2018

टेलिकॉम सेक्टर में FDI सीमा को 74% से बढ़ाकर 100% कर दिया गया।

डिजिटल इंडिया कार्यक्रम शुरू किया गया जिसके तहत सभी क्षेत्रों को इंटरनेट के माध्यम से जोड़ा जायेगा।

6. WHO COVID-19 के लिए 120 मिलियन रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट शुरू करेगा

29 सितंबर, 2020 को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने घोषणा की कि वह अपने सहयोगियों के साथ मिलकर COVID-19 के लिए 120 मिलियन रैपिड डायग्नोस्टिक परीक्षण शुरू करेगा। इससे निम्न और मध्यम आय वाले देशों को अमीर देशों के साथ परीक्षण अंतराल को भरने में मदद मिलेगी।

मुख्य बिंदु

डब्ल्यूएचओ द्वारा शुरू किए गए रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट एंटीजन आधारित होंगे। एक परीक्षण किट की कीमत 5 अमरीकी डालर होगी। यह कार्यक्रम अक्टूबर 2020 से शुरू होगा। यह उन क्षेत्रों तक पहुँचने में मदद करेगा जहाँ तक पहुँचना पीसीआर परीक्षणों के लिए कठिन है। पीसीआर परीक्षण आमतौर पर अमीर देशों द्वारा उपयोग किया जाता है क्योंकि यह महंगा है और परीक्षण का संचालन करने के लिए अधिक से अधिक विशेषज्ञों की आवश्यकता होती है।

एंटीजन टेस्ट

एंटीजन आधारित रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट प्रोटीन या एंटीजन की तलाश करते हैं जो वायरस की सतह पर पाए जाते हैं। वे पीसीआर परीक्षण की तुलना में उन्हें कम सटीक और बहुत तेज होते हैं।

वर्तमान परिदृश्य

उच्च आय वाले देश प्रति 100,000 लोगों पर प्रति दिन 292 परीक्षण कर रहे हैं। दूसरी ओर, कम आय वाले देश प्रति 100,000 लोगों पर 14 परीक्षण कर रहे हैं। इसलिए, इन देशों की परीक्षण क्षमताओं को बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है।

महत्व

डब्ल्यूएचओ के अनुसार, रैपिड डायग्नोस्टिक परीक्षण बहुत महत्व रखते हैं, जहां सामुदायिक संचरण व्यापक है और जहां न्यूक्लिक एसिड प्रवर्धन आधारित डायग्नोस्टिक टेस्ट (एनएएटी) अनुपलब्ध हैं। PCR एक NAAT परीक्षण है।

ACT-एक्सेलरेटर इनिशिएटिव

इसका नेतृत्व डब्ल्यूएचओ द्वारा किया जा रहा है। इसका पूर्ण स्वरूप Access to COVID-19 Tools Accelerator है। यह नए COVID-19 डायग्नोस्टिक्स, वैक्सीन के विकास, उत्पादन और न्यायसंगत पहुंच में तेजी लाने के लिए एक वैश्विक सहयोग है।

देशों ने प्रारंभिक वित्त पोषण के रूप में 8 बिलियन अमरीकी डालर की प्रतिबद्धता के साथ यह पहल शुरू की है।

7. हिमालयन चंद्र टेलीस्कोप के 20 वर्ष पूरे हुए

हिमालयन चंद्र टेलीस्कोप भारतीय खगोलीय वेधशाला (IAO) में स्थित है। यह धूमकेतुओं, तारकीय विस्फोटों, बाह्य-ग्रहों और क्षुद्रग्रहों की खोज के लिए रात में आकाश को स्कैन करता है।

मुख्य बिंदु

यह सेंटर फॉर रिसर्च एंड एजुकेशन इन साइंस एंड टेक्नोलॉजी (CREST), IIA (इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स) से उपग्रह संचार लिंक का उपयोग करता है। इस टेलीस्कोप ने 20 वर्षों के सफल संचालन को करने के लिए 260 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित किए गए।

आईएओ में अन्य टेलिस्कोप

इंडियन एस्ट्रोनॉमिकल ऑब्जर्वेटरी लद्दाख के हानले में स्थित है। इस ऑब्जर्वेटरी में स्थित टेलिस्कोप इस प्रकार हैं :

हिमालयन चंद्रा टेलिस्कोप

ग्लोबल रिले ऑफ़ ऑब्जर्वेटरीज वाचिंग ट्रांसिएंट हैपन (GROWTH) इंडिया

इमेजिंग चेर्नकोव टेलीस्कोप (MACE)

गामा-रे ऐरे टेलिस्कोप (HAGAR)

हिमालयन चंद्र टेलिस्कोप

यह 4,500 मीटर की ऊंचाई पर माउंट सरस्वती पर स्थित है।यह भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान, बैंगलोर द्वारा संचालित किया जाता है। यह IIA, बैंगलोर द्वारा 2000 में स्थापित किया गया था। इस टेलिस्कोप में तीन प्रमुख विज्ञान उपकरण हैं, नियर-आईआर इमेजर, हिमालयन फेंट ऑब्जेक्ट स्पेक्ट्रोग्राफ और ऑप्टिकल सीसीडी इमेजर।

इस टेलिस्कोप को INSAT-3B उपग्रह लिंक द्वारा दूर से संचालित किया जाता है जो शून्य से नीचे के तापमान में भी संचालन की अनुमति देता है।

इसने एक साल में 1000 जीबी डेटा उत्पन्न किया है।

MACE टेलिस्कोप

मेजर एटमॉस्फेरिक चेर्नकोव एक्सपेरिमेंट टेलीस्कोप एक इमेजिंग टेलीस्कोप है। यह दुनिया का सबसे ऊंचा चेर्नकोव टेलिस्कोप है। इसके अलावा, यह दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा गामा किरण टेलिस्कोप है। इस टेलीस्कोप का नाम यूएसएसआर के वैज्ञानिक पावेल चेर्नकोव के नाम पर रखा गया है। उन्होंने भविष्यवाणी की थी कि उच्च गति पर चलने वाले आवेशित कण प्रकाश का उत्सर्जन करते हैं।

HAGAR टेलिस्कोप

HAGAR का पूर्ण स्वरुप High Altitude Gamma Ray टेलीस्कोप है। यह एक वायुमंडलीय चेर्नकोव टेलिस्कोपहै जिसे 2008 में स्थापित किया गया था। इसमें सात टेलीस्कोप की एक सरणी है।

GROWTH टेलिस्कोप

यह भारत का पहला रोबोटिक टेलीस्कोप था। यह अल्पकालिक ब्रह्मांडीय ट्रांसिएंट और पृथ्वी के निकट के क्षुद्रग्रहों का अध्ययन करने के लिए टेलीस्कोप और खगोलविदों का एक अंतरराष्ट्रीय सहयोगी है।

8. प्रधानमंत्री मोदी ने नमामि गंगे मिशन के तहत उत्तराखंड में शुरू की 6 परियोजनाएं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 सितम्बर 2020 को उत्तराखंड में नमामि गंगे मिशन के तहत 6 मेगा प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन किया। इनमें सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी शामिल हैं। पीएम मोदी कार्यक्रम के दौरान गंगा को समर्पित एक म्यूजियम का भी लोकार्पण किया। यह म्यूजियम हरिद्वार के गंगा किनारे चांदनी घाट पर स्थित है। पीएम मोदी ने जल जीवन मिशन का लोगो भी लॉन्च किया है।

प्रधामंत्री ने इस मौके पर कहा कि आज मां गंगा की निर्मलता को सुनिश्चित करने वाले 6 प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं। जल जीवन मिशन भारत के गांवों में हर घर तक साफ पानी पहुंचाने का एक बहुत बड़ा अभियान है। इस मिशन का लोगो लोगों को पानी की हर एक बूंद को बचाने की प्रेरणा देगा। उत्तराखंड में हरिद्वार-ऋषिकेश क्षेत्र से गंगा नदी में लगभग 80 प्रतिशत अपशिष्ट जल बहाया जाता है।