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23rd March | Current Affairs | MB Books


1. बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान को गांधी शांति पुरस्कार 2020 से सम्मानित किया गया

संस्कृति मंत्रालय ने कहा है कि भारत सरकार ने बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान (Bangabandhu Sheikh Mujibur Rahman) को वर्ष 2020 के लिए गांधी शांति पुरस्कार से सम्मानित किया है। वर्ष 2019 के लिए शांति पुरस्कार ओमान के दिवंगत सुल्तान कबूस बिन सैद अल सैद (Sultan Qaboos bin Said Al Said) को प्रदान किया गया।

मुख्य बिंदु : 26 मार्च, 2021 को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ढाका की यात्रा से ठीक पहले यह शांति पुरस्कार प्रदान किया गया है। वह स्वतंत्रता की स्वर्ण जयंती और बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की जन्मशती समारोह में शामिल होंगे। बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान पहले राष्ट्रपति थे और बाद में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री भी बने। उन्हें “राष्ट्रपिता” या “मुजीब” कहा जाता है। 15 अगस्त, 1975 को उनकी हत्या कर दी गई थी। गांधी शांति पुरस्कार 2019 के विजेता सुल्तान कबूस आधुनिक अरब दुनिया के सबसे लंबे समय तक शासन करने वाले नेता थे। जनवरी, 2020 में उनका निधन हो गया था।

गांधी शांति पुरस्कार (Gandhi Peace Prize) : यह एक अंतर्राष्ट्रीय गांधी शांति पुरस्कार है जिसे महात्मा गांधी के नाम पर रखा गया है। यह पुरस्कार भारत सरकार द्वारा प्रदान किया जाता है। इसे गांधीवादी विचार को श्रद्धांजलि के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। यह पुरस्कार वर्ष 1995 में मोहनदास गांधी की 125वीं वर्षगांठ के अवसर पर लॉन्च किया गया था । यह वार्षिक पुरस्कार व्यक्तियों और संस्थानों को अहिंसा और अन्य गांधीवादी आदर्शों के माध्यम से राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन में उनके योगदान के लिए दिया जाता है। इसमें एक करोड़ रुपये नकद राशी, एक पट्टिका और एक प्रशस्ति पत्र शामिल है।


2. 23 मार्च: शहीद दिवस (Martyr’s Day)

हर साल, 23 मार्च को शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिवस तीन महान युवा नेताओं भगत सिंह, सुखदेव थापर और शिवराम राजगुरु के साहस और वीरता को याद करने के लिए मनाया जाता है। इस दिन इन तीन महान नेताओं को फांसी दी गयी थी।

मुख्य बिंदु : देश में इस दिन को शहीद दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। कई स्कूल और कॉलेज इस दिन को श्रद्धांजलि देते हैं और आभार व्यक्त करते हैं।

भगत सिंह : भगत सिंह का जन्म 1907 में हुआ था। उन्होंने “इंकलाब जिंदाबाद” को लोकप्रिय बनाया।

अन्य शहीद दिवस : 30 जनवरी को, भारत में मोहनदास करमचंद गांधी की हत्या को चिह्नित करने के लिए शहीद दिवस मनाया जाता है। 19 मई को बंगाली भाषा आंदोलन में अपने प्राणों की आहुति देने वाले 15 बंगालियों की याद में भाषा शहीद दिवस मनाया जाता है

21 अक्टूबर को पुलिस शहीद दिवस के रूप में चिह्नित किया जाता है। इसे पुलिस शहीद दिवस भी कहा जाता है। 21 अक्टूबर को, भारत-तिब्बत सीमा पर CRPF पर चीनी सेना द्वारा घात लगाकर हमला किया गया था।

17 नवंबर को, ओडिशा सरकार द्वारा लाला लाजपत राय की पुण्यतिथि मनाने के लिए शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है।

19 नवंबर को, महाराष्ट्र ने रानी लक्ष्मी भाई की जयंती मनाने के लिए शहीद दिवस मनाया जाता है।


3. 23 मार्च: विश्व मौसम विज्ञान दिवस (World Meteorological Day)

हर साल 23 मार्च को विश्व मौसम विज्ञान दिवस (World Meteorological Day) मनाया जाता है। यह 1950 में स्थापित किया गया था। इस दिन को विश्व मौसम संगठन (WMO) और संयुक्त राष्ट्र द्वारा भी मनाया जा रहा है।

23 मार्च को इसलिए चुना गया है क्योंकि 1950 में उस दिन विश्व मौसम संगठन (World Meteorological Organization) की स्थापना हुई थी।

थीम: The Ocean, Our Climate and Weather

मुख्य बिंदु : WMO की स्थापना को चिह्नित करने के लिए यह दिन मनाया जाता है, जिसमें 193 सदस्य देश और क्षेत्र हैं। यह संगठन अंतर्राष्ट्रीय मौसम विज्ञान संगठन (IMO) से उत्पन्न हुआ है, जिसका विचार वियना अंतर्राष्ट्रीय मौसम विज्ञान कांग्रेस 1873 में निहित है। WMO को 1950 में WMO सम्मेलन के अनुसमर्थन द्वारा स्थापित किया गया था, जिसके बाद यह संगठन संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष एजेंसी बन गई। WMO का मुख्यालय स्विट्जरलैंड के जिनेवा में स्थित है।

विश्व मौसम विज्ञान दिवस का महत्व : यह दिन दुनिया भर में बहुत महत्व रखता है क्योंकि यह समाज की सुरक्षा और भलाई के लिए राष्ट्रीय मौसम विज्ञान और जल विज्ञान सेवाओं के आवश्यक योगदान को प्रदर्शित करता है। इस दिवस का उद्देश्य पृथ्वी पर विभिन्न चिंताओं के बारे में दुनिया भर में जागरूकता फैलाना है।


4. भारतीय SARS-CoV-2 जीनोमिक्स कंसोर्टियम (INSACOG)

सरकार ने भारत भर में SARS-CoV-2 की जीनोमिक निगरानी के लिए “भारतीय SARS-CoV-2 जीनोमिक्स कंसोर्टियम (INSACOG)” की स्थापना की है।

मुख्य बिंदु : इसकी घोषणा केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में की। मंत्री ने यह भी कहा कि, इस कंसोर्टियम में दस क्षेत्रीय जीनोम अनुक्रमण प्रयोगशालाएं (RGSL) अर्थात् ILS भुवनेश्वर, NIBMG कल्याणी, NCCS पुणे, ICMR-NIV पुणे, CDFD हैदराबाद, CSIR-CCMB हैदराबाद, NIMHANS बेंगलुरु, InStem / NCBS बेंगलुरु, CSIR-IGIB दिल्ली, और NCDC दिल्ली शामिल हैं।

Regional Genome Sequencing Laboratories (RGSL) : देश भर में RGSL वर्तमान में अपने आंतरिक कोष और संसाधनों का उपयोग कंसोर्टियम की गतिविधियों को करने के लिए कर रहे हैं। फंड को मंजूरी देने का प्रस्ताव जैव प्रौद्योगिकी विभाग के साथ वित्तीय मूल्यांकन प्रक्रिया के अधीन है।

INSACOG क्या है? :

  • INSACOG को यूके वेरिएंट के उद्भव की पृष्ठभूमि में लॉन्च किया गया था। INSACOG का उद्देश्य वायरस निगरानी, ​​लक्षण वर्णन और जीनोम अनुक्रमण में तेजी लाना है।

  • यह BT-NIBMG, DBT-ILS, ICMR-NIV, DBT-NCCS, CSIR-CCMB, DBT-CDFD, DBT-InSTEM, NIMHANS, CSIR-IGIB और NCDC नामक दस प्रयोगशालाओं का एक संघ है।इन प्रयोगशालाओं को अब INSACOG लैब्स कहा जाता है।

  • INSACOG में अंतर-मंत्रालयीय संचालन समिति होगी। यहसमिति कंसोर्टियम को मार्गदर्शन और निगरानी प्रदान करेगी।

  • भविष्य में, INSACOG वैक्सीन, डायग्नोस्टिक्स और संभावित चिकित्सा विकसित करने में मदद करेगा।

  • जैव प्रौद्योगिकी विभाग, सीएसआईआर और आईसीएमआर द्वारा INSACOG के लिए एक रोड मैप तैयार किया गया है।

5. केन-बेतवा : पहली रिवर लिंकिंग परियोजना

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने केन-बेतवा नदियों की इंटरलिंकिंग परियोजना के बारे में अपनी आशंका व्यक्त की है। मंत्री ने कहा कि नदियों के परस्पर संपर्क से मध्य प्रदेश राज्य में स्थित पन्ना टाइगर रिजर्व नष्ट हो जाएगा।

पृष्ठभूमि : मंत्री ने यह भी कहा कि, उन्होंने 10 साल पहले नदी को आपस में जोड़ने के विकल्प सुझाए थे, लेकिन उन सिफारिशों को नजरअंदाज कर दिया गया था।

केन बेतवा रिवर लिंकिंग प्रोजेक्ट (Ken Betwa River Linking Project) : इस रिवर इंटरलिंकिंग परियोजना का उद्देश्य मध्य प्रदेश में केन नदी से उत्तर प्रदेश में बेतवा नदी तक अधिशेष जल को मोड़ना है। यह उत्तर प्रदेश में झांसी, ललितपुर, बांदा और महोबा जिलों के जिलों और मध्य प्रदेश के टीकमगढ़, छतरपुर और पन्ना जिलों को सिंचित करने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

इंटरलिंकिंग की क्या आवश्यकता है? : भारत को वार्षिक वर्षा के माध्यम से 80% पानी प्राप्त होता है, जबकि सतही जल प्रवाह जून से सितंबर तक 4 महीने की अवधि के लिए होता है। इस प्रकार, प्राकृतिक पानी की उपलब्धता की कमी रहती है। यह समस्या नदियों की इंटरलिंकिंग से सुलझाई जा सकती है।

इंटरलिंक करने के फायदे : नदी को जोड़ने से खे को रोकने और बुंदेलखंड क्षेत्र में भूजल पर अत्यधिक निर्भरता को कम करने में मदद मिलेगी। इस प्रकार यह किसानों की आत्महत्या की दर को स्थिर आजीविका सुनिश्चित करके कम करने में मदद करेगा। यह दो राज्यों में 13 लाख लोगों को पेयजल उपलब्ध कराने के साथ-साथ 75 मेगावाट बिजली का उत्पादन करेगा।

चिंताएं : दौधन बांध के निर्माण से पन्ना टाइगर रिजर्व के महत्वपूर्ण बाघ निवास का 10% जलमग्न हो जाएगा। यह बदले में बाघ संरक्षण प्रयासों को प्रभावित करेगा। बांध की ऊंचाई का गिद्धों के घोंसले वाले स्थानों पर प्रभाव पड़ेगा।


6. केंद्र और 2 राज्य सरकारों ने नदी जोड़ो परियोजना समझौते पर किए हस्ताक्षर

जल शक्ति मंत्रालय और मध्य प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश की सरकारों ने केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना (केबीएलपी) के क्रियान्वयन के लिए सोमवार को एक समझौते पर हस्ताक्षर किए, जो राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना (एनआरएलपी) के तहत पहली बड़ी परियोजना है। जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस परियोजना के कार्यान्वयन के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इस परियोजना के तहत केन नदी से बेतवा नदी में पानी भेजा जाएगा। इसके लिए दौधन बांध का निर्माण किया जाएगा। दोनों नदियों को जोड़ने वाली नहर, लोअर परियोजना, कोठा बैराज और बीना परिसर बहुद्देशीय परियोजना से इसमें मदद मिलेगी। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि वर्षा जल से संरक्षण के साथ ही देश में नदी जल के प्रबंधन पर भी दशकों से चर्चा होती रही है, लेकिन अब देश को पानी के संकट से बचाने के लिए इस दिशा में तेजी से कार्य करना आवश्यक है। उन्होंने केन-बेतवा संपर्क परियोजना को इसी दूरदृष्टि का हिस्सा बताया। उन्होंने इस परियोजना को पूरा करने की दिशा में काम करने के लिए उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सरकारों की प्रशंसा की। मोदी ने कहा कि यह परियोजना बुंदेलखंड के भविष्य को नई दिशा देगी। केबीएलपी से 10.62 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सालभर सिंचाई हो सकेगी, 62 लाख लोगों को पेयजल आपूर्ति संभव होगी और 103 मेगावॉट बिजली पैदा की जा सकेगी। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी वक्तव्य में बताया गया कि इस परियोजना से पानी की कमी से जूझ रहे बुंदेलखंड क्षेत्र, खासकर मध्य प्रदेश के पन्ना, टीकमगढ़, छतरपुर, सागर, दमोह, दतिया, विदिशा, शिवपुरी तथा रायसेन और उत्तर प्रदेश के बांदा, महोबा, झांसी और ललितपुर को बहुत लाभ मिलेगा। यह परियोजना अन्य नदी जोड़ो परियोजनाओं का मार्ग भी प्रशस्त करेगी, जिनसे यह सुनिश्चित हो सकेगा कि पानी की कमी देश के विकास में अवरोधक नहीं बने। यह परियोजना की मदद से वर्ष में 10.62 लाख हेक्टेयर क्षेत्र (मध्य प्रदेश में 8.11 लाख हेक्टेयर और उत्तर प्रदेश में 2.51 लाख हेक्टेयर क्षेत्र) में सिंचाई हो सकेगी। इससे करीब 62 लाख लोगों (मध्य प्रदेश में 41 लाख और उत्तर प्रदेश में 21 लाख) को पेयजल की आपूर्ति होगी। इस परियोजना के तहत 9,000 हेक्टेयर क्षेत्र में पानी रोका जाएगा, जिनमें से 5,803 हेक्टेयर क्षेत्र पन्ना बाघ अभयारण्य के तहत आता है। एनआरएलपी को औपचारिक रूप से राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना (एनपीपी) के नाम से जाना जाता है। इसके तहत अतिरिक्त जल वाले जलाशयों से जल की कमी वाले जलाशयों में पानी भेजे जाने की योजना बनाई गई है।


7. संसद ने खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक को मंजूरी दी

संसद ने 22 मार्च 2021 को खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक 2021 विधेयक को मंजूरी प्रदान कर दी। इस विधेयक का उद्देश्य खदानों की नीलामी एवं आवंटन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना एवं कारोबार के अनुकूल माहौल तैयार करना है। खान मंत्री प्रह्लाद जोशी ने राज्यसभा में इस विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए आश्वासन दिया कि इस विधेयक के माध्यम से खानों के आवंटन में राज्यों का कोई अधिकार नहीं लिया जा रहा है।

सदन ने मंत्री के जवाब के बाद विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया। लोकसभा इसे पहले ही पारित कर चुकी है। बिल पर चर्चा की शुरुआत करते हुए खान मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि इस विधेयक से खनन क्षेत्र में 55 लाख रोजगार सृजित होंगे। जोशी ने कहा कि इस विधेयक से खनन क्षेत्र में खानों की नीलामी की राह आसान होगी।

लोकसभा ने खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक 2021 को 19 मार्च को मंजूरी प्रदान की थी। निचले सदन में विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए खान एवं खनन मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा था कि खान और खनन में केंद्र सरकार, राज्यों का कोई अधिकार नहीं लेना चाहती है और इस संबंध में सभी पैसा राज्यों को ही जायेगा।

मुख्य बिंदु : केंद्रीय मंत्री प्रशाद जोशी का कहना है कि इन बदलावों से रोजगार के अवसर पैदा करने में मदद मिलेगी और खनन गतिविधियों में बढ़ी हुई तकनीक के साथ निजी क्षेत्र को अनुमति मिलेगी।

खनन क्षेत्र में सुधार से 55 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे। खनन गतिविधि को बढ़ाने के लिए, हम खनिज अन्वेषण में उन्नत प्रौद्योगिकी के साथ निजी क्षेत्र की अनुमति देंगे।

केंद्रीय मंत्री प्रशाद जोशी के मुताबिक, भारत 95 खनिजों का उत्पादन करता है और इसमें दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया की तरह ही क्षमता है लेकिन अभी भी सोने और कोयले जैसे खनिजों का आयात होता है।

सकल घरेलू उत्पाद में 1.75 प्रतिशत योगदान : खनन क्षेत्र वर्तमान में देश के सकल घरेलू उत्पाद में 1.75 प्रतिशत योगदान देता है और विधेयक में प्रस्तावित सुधारों के माध्यम से योगदान 2.5 प्रतिशत तक बढ़ जाएगा और अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा।

खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम : विधेयक में खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 में संशोधन करने की बात कही गई है और विरासत के मुद्दों में समाधान के साथ इस क्षेत्र में बड़े सुधार किए जाएंगे, जिससे बड़ी संख्या में खदानें नीलामी के लिए उपलब्ध हो जाएंगी। इससे नीलामी-केवल व्यवस्था को मजबूत करने और व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने में सहायता मिलेगी।


8. प्रधानमंत्री मोदी ने जल शक्ति अभियान की शुरुआत की

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 मार्च 2021 को ‘विश्व जल दिवस’ के मौके पर जल शक्ति अभियान की शुरुआत की। प्रधानमंत्री मोदी कोरोना वायरस की वजह से ने इस अभियान को वीडिया कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए लॉन्च किया। प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम में कहा कि मौजूदा समय में जलशक्ति के प्रति जागरुकता और प्रयास दोनों बढ़ रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने इस मौके पर अपने संबोधन में कहा कि मुझे खुशी है कि जलशक्ति के प्रति जागरूकता बढ़ रही है और प्रयास भी बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज भारत में पानी की समस्या के समाधान के लिए 'कैच द रैन' की शुरुआत के साथ ही केन बेतवा लिंक नहर के लिए भी बहुत बड़ा कदम उठाया गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना हो या हर खेत को पानी अभियान, 'Per Drop More Crop' अभियान हो या नमामि गंगे मिशन, जल जीवन मिशन हो या अटल भूजल योजना, सभी पर तेजी से काम हो रहा है। भारत वर्षा जल का जितना बेहतर प्रबंधन करेगा उतना ही भूजल पर देश की निर्भरता कम होगी।

बारिश के पानी का बचाना जरूरी क्यों? : भारत एक कृषि प्रधान देश है और इसकी कृषि लंबे समय तक वर्षा जल पर आधारित रही है। यह दोनों ही मानी गईं बातें हैं। इसके बाद हरित क्रांति हुई और उत्पादकता बढ़ाने के लिए सिंचाई के अन्य साधन आए, लेकिन वर्षा जल की उपयोगिता कम नहीं हुई।

जल शक्ति अभियान: एक नजर में : देश के सभी शहरी व ग्रामीण इलाकों में शुरू होने वाले इस अभियान का थीम 'catch the rain, where it falls, when it falls' है। ये अभियान 22 मार्च से 30 नवंबर तक चलेगा। इस दौरान सभी शहरी और ग्राणीण क्षेत्रों के लोगों को जागरुक किया जाएगा और ये बताया जाएगा की किस तरह से वह जल बचाकर अपने भविष्य को बेहतर कर सकते हैं।

इस अभियान का उद्देश्य सभी हितधारकों को बारिश के पानी के भंडारण को सुनिश्चित करने के लिए जलवायु परिस्थितियों और उप-समतल क्षेत्रों के लिए उपयुक्त बारिश का पानी संरक्षित करना है। इस अभियान से सबसे अधिक फायदा उन क्षेत्रों को मिलेगा जहां पानी की कमी से जनजीवन प्रभावित है।

इस अभियान का फायदा : इस अभियान से सबसे अधिक फायदा उन क्षेत्रों को मिलेगा जहां पानी की कमी से जनजीवन प्रभावित है। इन क्षेत्रों में मध्यप्रदेश का बुंदेलखंड, पन्ना, टिकमगढ़, छतरपुर, सागर , दामोह, दतिया, विदिशा, शिवपुरी और रायसेन हैं। वहीं उत्तर प्रदेश का बांदा, महोबा, झांसी, ललितपुर भी पानी से जूझते रहते हैं।






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