Search

21st September | Current Affairs | MB Books


1. अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस : 21 सितम्बर

प्रतिवर्ष 21 सितम्बर को अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस मनाया जाता है। इस दिवस को पहली बार 1981 में मनाया गया था। इसका उद्देश्य वैश्विक शान्ति को बढ़ावा देना है। यह दिवस संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देशों द्वारा मनाया जाता है।

अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा प्रस्ताव पारित किया गया था, इस प्रस्ताव को यूनाइटेड किंगडम और कोस्टा रिका द्वारा प्रस्तावित किया गया था। 2001 तक इस दिवस को सितम्बर के तीसरे मंगलवार को मनाया जाता था, 2001 के बाद से इस दिवस को 21 सितम्बर को मनाया जाने लगा। 2013 में इस दिवस को संयुक्त राष्ट्र के महासचिव द्वारा शांति शिक्षा के लिए समर्पित किया गया था, यह विश्व में शांति स्थापित करने तथा इसे बनाये रखने के लिए आवश्यक है।

संयुक्त राष्ट्र

संयुक्त राष्ट्र संघ (UN) एक अंतरसरकारी संगठन है, इसकी स्थापना अंतर्राष्ट्रीय सहयोग तथा शांति की स्थापना के लिए की गयी थी। संयुक्त राष्ट्र की स्थापना लीग ऑफ़ नेशंस नामक संगठन के स्थान पर की गयी थी। संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना 24 अक्टूबर, 1945 को की गयी थी, स्थापना के समय संयुक्त राष्ट्र के 51 सदस्य देश थे, वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र संघ के सदस्यों की संख्या 193 हैं। इसका मुख्यालय अमेरिका के न्यूयॉर्क में स्थित है। वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र संघ के अध्यक्ष अंतोनियो गुटेरेस हैं।

2. DCGI ने कम लागत के कोविड -19 परीक्षण 'फेलुदा' के वाणिज्यिक शुभारंभ को दी मंजूरी

ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने इस 19 सितंबर, 2020 को TATA CRISPER (क्लस्टर्ड रेगुलेटरी इंटरसेप्टर शॉर्ट पालिंड्रोमिक रिपीट) के कोविड -19 परीक्षण ’फेलुदा’ के वाणिज्यिक शुभारंभ को मंजूरी दे दी है। यह खबर वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) द्वारा साझा की गई थी।

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के दिशानिर्देशों के अनुसार, इस परीक्षण में 96% संवेदनशीलता और कोरोना वायरस का पता लगाने के लिए 98% विशिष्टता के साथ उच्च गुणवत्ता वाले बेंचमार्क मिले हैं।

यह TATA CRISPER परीक्षण कोविड -19 का कारण बनने वाले वायरस का सफलतापूर्वक पता लगाने के लिए विशेष रूप से अनुकूलित Ca9 प्रोटीन को तैनात करने वाला दुनिया का पहला नैदानिक ​​परीक्षण होगा।

TATA CRISPER परीक्षण का महत्व

TATA CRISPER परीक्षण पारंपरिक RT-PCR परीक्षणों की सटीकता के स्तर को कम समय में हासिल करने, उपयोग में आसानी में और बेहतर होने के साथ कम खर्चीले उपकरणों से प्राप्त करेगा। इसके अलावा, CRISPER एक भविष्य की भी तकनीक है जिसे भविष्य में कई अन्य रोगजनकों के पता लगाने के लिए भी तैयार किया जा सकता है।

इसने भारतीय वैज्ञानिक समुदाय के लिए भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है, जो 100 दिनों से भी कम समय में अनुसंधान और विकास से उच्च सटीकता, स्केलेबल और विश्वसनीय परीक्षण के लिए आगे बढ़ रहा है।

मुख्य विशेषताएं

• इस TATA CRSISPER तकनीक को CSIR-IGIB (इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी) द्वारा विकसित किया गया है।

• टाटा समूह ने इस उच्च गुणवत्ता वाले परीक्षण को बनाने के लिए ICMR और CSIR-IGIB के साथ मिलकर काम किया था, जोकि 'मेड इन इंडिया' परीक्षण के साथ राष्ट्र को जल्द ही और आर्थिक रूप से सस्ते, विश्वसनीय, सुरक्षित और सुलभ कोविड ​​-19 परीक्षण को सफल बनाने में मदद करेगा।

• कोविड -19 की जांच के लिए TATA CRISPER परीक्षण को मिलने वाला यह अनुमोदन, कोविड -19 महामारी से लड़ने में देश के प्रयासों को बढ़ावा देगा।

TATA CRISPER टेस्ट क्या है और यह कैसे काम करता है?

CSIR के अनुसार, TATA CRISPER परीक्षण एक स्वदेशी रूप से विकसित, अत्याधुनिक CRISPER तकनीक का उपयोग SARS-CoV-2 वायरस के जीनोमिक अनुक्रम का पता लगाने के लिए करता है। CRISPER रोगों का निदान करने के लिए यह एक जीनोम एडिटिंग तकनीक है।

CSIR-IGIB के निदेशक श्री अनुराग अग्रवाल के अनुसार, जीनोम डायग्नॉस्टिक्स और थैरेप्यूटिक्स के लिए सिकल सेल मिशन के तहत वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) द्वारा शुरू किया गया यह कार्य एक नया ज्ञान पैदा करता है जिससे SARS-CoV-2 के लिए नए नैदानिक ​​परीक्षण को जल्दी विकसित किया जा सकता है।

भारत में अनुसंधान और विकास की क्षमता

गिरीश कृष्णमूर्ति, CEO, टाटा मेडिकल एंड डायग्नोस्टिक लिमिटेड, ने इस विकास पर अपनी टिप्पणी करते हुए यह कहा है कि, इस TATA CRISPER परीक्षण का व्यवसायीकरण देश में जबरदस्त R&D क्षमता को दर्शाता है, जो वैश्विक स्वास्थ्य सेवा और वैज्ञानिक अनुसंधान जगत में भारत के सहयोग को बढ़ाने में अपना योगदान प्रदान कर सकता है।

CSIR-IGIB के निदेशक श्री अनुराग अग्रवाल के अनुसार, इस गतिविधि ने सौविक मैती और देबज्योति चक्रवर्ती के नेतृत्व वाली युवा अनुसंधान टीम के नवाचार के साथ-साथ वैज्ञानिक ज्ञान और प्रौद्योगिकी के परस्पर संबंध को दिखाया है।

3. भारतीय नौसेना के युद्धपोत पर पहली बार तैनात होंगी दो महिला अधिकारी

भारतीय नौसेना में लिंग-समानता को साबित करने वाले एक कदम के तहत सब-लेफ्टिनेंट कुमुदिनी त्यागी तथा सब-लेफ्टिनेंट रिति सिंह को नौसेना के युद्धपोत पर क्रू के रूप में तैनात किया जाएगा, और वे ऐसा करने वाली पहली महिला अधिकारी होंगी। हालांकि भारतीय नौसेना कई महिला अधिकारियों को भर्ती करती रही है, लेकिन अब तक महिला अधिकारियों को युद्धपोतों पर लम्बे अरसे के लिए तैनात नहीं किया गया है, जिसके पीछे कई कारण हैं - क्रू क्वार्टरों में निजता की कमी तथा महिलाओं के लिए विशेष बाथरूम व्यवस्था की उपलब्धता न होना।

अब यह सब जल्द ही बदलना तय है दो युवा महिला अधिकारी नौसेना के मल्टी-रोल हेलीकॉप्टरों में लगे सेंसरों को ऑपरेट करने की ट्रेनिंग ले रही हैं माना जा रहा है कि ये दो अधिकारी नौसेना के नए एमएच-60 आर हेलीकॉप्टरों में उड़ान भरेंगी एमएच-60 आर हेलीकॉप्टरों को अपनी श्रेणी में दुनिया में सबसे अत्याधुनिक मल्टी-रोल हेलीकॉप्टर माना जाता है इसे दुश्मन के पोतों और पनडुब्बियों को डिटेक्ट करने और उन्हें उलझाने के लिए डिज़ाइन किया गया है वर्ष 2018 में तत्कालीन रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण ने लॉकहीड-मार्टिन द्वारा निर्मित हेलीकॉप्टरों की खरीद को मंज़ूरी दी थी, जिसका मूल्य लगभग 2.6 अरब अमेरिकी डॉलर था

महिला अधिकारियों की युद्धपोतों पर तैनाती की ख़बर ऐसे वक्त में सामने आई है, जब भारतीय वायुसेना (IAF) ने भी महिला लड़ाकू पायलट को राफेल विमानों की फ्लीट को ऑपरेट करने के लिए शॉर्टलिस्ट किया है

4. कुपोषण को नियंत्रित करने के लिए आयुष मंत्रालय और केन्द्रीय महिला व बाल विकास मंत्रालय के बीच MoU पर हस्ताक्षर किये गये

आयुष मंत्रालय और महिला व बाल विकास मंत्रालय ने 20 सितंबर, 2020 को देश में कुपोषण को नियंत्रित करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। इस एमओयू पर पोशन अभियान के तहत हस्ताक्षर किए गए थे।

मुख्य तथ्य

महिला और बाल विकास मंत्रालय देश में कुपोषण को नियंत्रित करने के लिए वैज्ञानिक रूप से सिद्ध और उपयोगकर्ता आधारित समाधान शुरू करेगा।

आंगनवाड़ी केंद्रों पर औषधीय और पोषक उद्यान स्थापित किए जाएंगे।

इस समझौता ज्ञापन के तहत, सहयोग के लिए विशिष्ट क्षेत्रों की पहचान की गई है:

पोषन अभियान में आयुष का एकीकरण।

आयुर्वेद, योग और अन्य आयुष पहलों के सिद्धांतों और प्रथाओं के माध्यम से कुपोषण को नियंत्रित करना।

यह एमओयू निम्नलिखित गतिविधियों को लागू करने का प्रयास करेगा:

आंगनबाड़ी केंद्रों में योग कार्यक्रम।

महीने में एक बार आंगनवाड़ी केंद्रों में आयुष कर्मचारियों की यात्रा।

आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ आयुष चिकित्सा अधिकारियों की संवेदनशील बैठक

पोषण वाटिका का विकास

क्षेत्र विशिष्ट पोषण मूल्यों का कार्यान्वयन।

आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को ‘DHATRI’ – Dedicated Health Activist to Replenish the Innutrition के रूप में नामित किया जा सकता है, जो कि जमीनी स्तर पर आयुर्वेद पोषण संदेश प्रदान कर रहा है।

डिजिटल मीडिया के माध्यम से गतिविधियों पर जागरूकता उत्पन्न करने के लिए मंत्रालयों ने हैशटैग #Ayush4Anganwadi लांच किया।

कुपोषण पर रिपोर्ट

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 194.4 मिलियन लोग कुपोषित हैं। यह कुल जनसंख्या का लगभग 14.5% है।

ग्लोबल हंगर इंडेक्स में, भारत 2019 में 117 देशों में से 102वें स्थान पर था।

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने 2017 में बताया कि 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु का प्रमुख कारण कुपोषण था।

रोग अध्ययन 2017 के वैश्विक बोझ भी रिपोर्ट करते हैं कि, कुपोषण भारत में मृत्यु और विकलांगता का प्रमुख कारण है।

वैश्विक पोषण रिपोर्ट, 2020

इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत में प्रजनन आयु की दो में से एक महिला एनीमिक है।

20.8% बच्चे वेस्टेड हैं जबकि 37.9% बच्चे स्टंटिड है।

भारत उन 88 देशों में शामिल है, जिनके 2025 तक वैश्विक पोषण लक्ष्य चूकने की संभावना है।

कुपोषण के कारण क्या हैं?

कुपोषण के प्रमुख कारणों में शामिल हैं- गरीबी, स्तनपान कराने वाली माताओं की खराब स्वास्थ्य स्थिति, सामाजिक असमानताएं, खराब स्वच्छता, पौष्टिक और विविधतापूर्ण भोजन की कमी, खराब खाद्य सुरक्षा प्रावधान और सरकारी पहलों की विफलता।

भारत में शुरू की गयी पहलें

समेकित बाल विकास योजना : भोजन प्रदान करने और गरीब व हाशिए पर रहने वाले बच्चों के लिए आहार सेवन में सुधार लाने के लिए।

मध्याह्न भोजन योजना : सरकारी कोष से सहायता प्राप्त सभी सरकारी स्कूलों में बच्चों को ताजा पका हुआ भोजन के प्रदान करने के लिए।

फूड फॉर लाइफ अन्नामृत कार्यक्रम : यह कार्यक्रम इस्कॉन फूड रिलीफ फाउंडेशन और अक्षय पात्र फाउंडेशन द्वारा चलाया जाता है जो दुनिया का सबसे बड़ा एनजीओ द्वारा संचालित मध्याह्न भोजन कार्यक्रम हैं।

राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन : गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य देखभाल की उपलब्धता और पहुंच में सुधार करना।

पोशन अभियान : जागरूकता फैलाने के लिए और बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए पोषण संबंधी सेवन में सुधार लाने के लिए।

5. भारत ने मालदीव को कोविड-19 संकट से निपटने हेतु 25 करोड़ डॉलर की वित्तीय सहायता दी

भारत ने कोरोना (कोविड-19) महामारी के अर्थव्यवस्था पर पड़े प्रभाव से निपटने में मदद हेतु मालदीव को 25 करोड़ डॉलर की वित्तीय सहायता उपलब्ध करायी है। यह जानकारी भारतीय दूतावास ने 20 सितम्बर 2020 को दी। यह सहायता मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से देश की कठिन आर्थिक स्थिति से पार पाने में मदद के आग्रह के बाद दी गयी है।

प्रधानमंत्री मोदी ने 21 सितम्बर 2020 को कहा कि एक गहरे मित्र और पड़ोसी होने के नाते भारत और मालदीव कोविड-19 से पैदा हुई स्वास्थ्य और आर्थिक चिंताओं का मुकाबला करने के लिए एक-दूसरे का सहयोग जारी रखेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने यह बात मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह के एक ट्वीट के जवाब में कही।

मालदीव के राष्ट्रपति ने क्या कहा?

मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह ने उनके देश की वित्तीय सहायता करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद दिया था। राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह ने कहा कि मालदीव को जब भी दोस्त की जरूरत महसूस हुई है भारत ने हमेशा उसकी मदद की है। 25 करोड़ डॉलर की वित्तीय सहायता के रूप में सदाशयता और पड़ोसी होने की भावना दिखाने के लिए मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भारत और वहां की जनता का तहेदिल से शुक्रिया करता हूं।

प्रधानमंत्री मोदी ने क्या कहा?

प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट किया कि राष्ट्रपति सोलिह, आपकी भावनाओं का हम आदर करते हैं। एक गहरे मित्र और पड़ोसी होने के नाते भारत और मालदीव कोविड-19 से पैदा हुई स्वास्थ्य और आर्थिक चिंताओं का मुकाबला करने के लिए एक-दूसरे का सहयोग जारी रखेंगे।

ट्रेजरी बिल की अवधि दस साल

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ डिजिटल माध्यम से बैठक के दौरान वित्तीय सहायता की घोषणा की गयी थी। यह सहायता भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), माले को ट्रेजरी बांड की बिक्री के जरिये उपलब्ध करायी गयी। भुगतान को लेकर ट्रेजरी बिल की अवधि दस साल है।

मालदीव को लेकर भारत तत्पर

भारत ने कोवड-19 महामारी के दौरान निरंतर मालदीव को सहायता उपलब्ध करायी है। कोविड-19 महामरी से निपटने को लेकर डॉक्टरों और विशेषज्ञों का एक दल मार्च में मालदीव गया था। अप्रैल में 5.5 टन जरूरी दवाओं की खेप दी गयी। वहीं 6.2 टन दवाएं और 580 टन खाद्य पदार्थ मई में भारतीय वायु सेना ने पहुंचाये। मालदीव सरकर के आग्रह पर भारत वहां की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने हेतु अल्प अवधि के लिये अनुबंध के आधार पर नियुक्त किये गये डॉक्टरों और नर्सों को भेजेगा। मालदीव के राजस्व में पर्यटन की एक तिहाई हिस्सेदारी है। कोविड-19 संकट के कारण पर्यटन पर बुरा असर पड़ा है।

भारत और मालदीव के बीच संबंध

भारत और मालदीव के बीच दशकों से अच्छे संबंध रहे हैं। प्राचीन समय में मालदीव पर भारतीय हिंदू संस्कृति का अत्यधिक प्रभाव रहा है। मालदीव को ब्रिटिशों से 26 जुलाई 1965 में आजादी मिली थी। भारत मालदीव को एक सम्प्रभु राष्ट्र के रूप में सबसे पहले मान्यता देने वाले देशों में से एक है। भारत अनेक योजनाओं के तहत मालदीव के छात्रों को छात्रवृत्ति प्रदान करता है।

भारत और मालदीव ने वर्ष 1981 में एक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किये थे जो आवश्यक वस्तुओं के निर्यात का प्रावधान करता है। दोनों देशों की निकटता और हवाई संपर्क में सुधार के कारण पर्यटन तथा व्यापार के लिये मालदीव जाने वाले भारतीयों की संख्या में वृद्धि हुई है। दोनों देशों का लंबा सांस्कृतिक इतिहास रहा है और इन संबंधों को और मज़बूत करने के लिये निरंतर प्रयास जारी है।

6. प्रधानमंत्री मोदी ने बिहार में 9 राजमार्ग परियोजना का शुभारंभ किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बिहार में घर तक फाइबर केबल नेटवर्क तथा राजमार्गों से जुड़ी 9 परियोजनाओं का शुभारंभ किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज बिहार की विकास यात्रा का एक और अहम दिन है। प्रधानमंत्री ने बिहार में कनेक्टिविटी को बढ़ाने वाली 9 परियोजनाओं का शिलान्यास किया है।

इन परियोजनाओं में हाइवे को 4 लेन और 6 लेन का बनाने और नदियों पर 3 बड़े पुलों के निर्माण का काम शामिल है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत के गांवों में इंटरनेट उपयोग करने वालों की संख्या शहरों से ज्यादा हो जाएगी, ये कुछ वर्षों तक सोचना मुश्किल था।

प्रधानमंत्री ने क्या कहा?

प्रधानमंत्री मोदी विकास परियोजना का शिलान्यास करने के बाद प्रदेश की जनता को वर्चुअल प्लेटफॉर्म से संबोधित करते हुए कहा कि देश की संसद ने किसानों को नए अधिकार देने वाले बहुत ही ऐतिहासिक कानूनों को पारित किया है। उन्होंने कहा कि मैं देश के लोगों को इसके लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं। ये सुधार 21वीं सदी के भारत की जरूरत है।

घर तक फाइबर कार्यक्रम

बिहार की इन योजनाओं में 14,000 करोड़ रुपये की 9 राजमार्ग परियोजना और 45,945 गांवों को ऑप्टिकल फाइबर इंटरनेट सेवाओं से जोड़ने वाला 'घर तक फाइबर' कार्यक्रम शामिल है। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे देश में अब तक उपज बिक्री की जो व्यवस्था चली आ रही थी, जो कानून थे, उसने किसानों के हाथ-पांव बांधे हुए थे।

बिहार के विकास के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं शुरू

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विगत दो सप्ताह से बिहार के विकास के लिए अनेक नई नई जनकल्याणकारी योजनाएं शुरू कर रहे हैं। विधानसभा चुनाव से पहले बिहार को सौगात मिलने का सिलसिला जारी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज बिहार को करीब 14 हजार करोड़ रुपये की सौगात दी।

पड़ोसी राज्यों को भी मिलेगा लाभ

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बिहार में जिन 9 हाईवे प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास हुआ है उसका लाभ पड़ोसी राज्यों झारखंड और उत्तर प्रदेश के लोगों को भी मिलेगा। इतना ही नही, अब देश के किसान, बड़े-बड़े स्टोरहाउसेज और कोल्ड स्टोरेज में अपने फसल का आसानी से भंडारण कर पाएंगे. जब भंडारण से जुड़ी कानूनी दिक्कतें दूर होंगी तो हमारे देश में कोल्ड स्टोरेज का भी नेटवर्क और विकसित होगा।

पृष्ठभूमि

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18 सितम्बर 2020 को ऐतिहासिक और शानदार कोसी रेल महासेतु को राष्ट्र को समर्पित किया था और इस अवसर पर बिहार के रेल यात्रियों की सुविधाओं के लिए 12 रेल परियोजनाओं का शुभारंभ भी किया था। इससे पहले मोदी कैबिनेट की बैठक में दरभंगा में एम्स के लिये मंजूरी दी गई थी।

7. HCL टेक ऑस्ट्रेलियाई आईटी कंपनी डीडब्ल्यूएस का अधिग्रहण करेगी

एचसीएल टेक्नालॉजीज ने सोमवार को कहा कि वह ऑस्ट्रेलियाई आईटी समाधान कंपनी डीडब्ल्यूएस का अधिग्रहण करेगी। इस कदम से कंपनी को ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बाजारों में अपनी स्थिति मजबूत करने में मदद मिलेगी।

एचसीएल टेक्नालॉजीज ने शेयर बाजार को बताया कि पूरी तरह चुकता आधार पर कुल 13.18 करोड़ शेयरों के लिए 15.82 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (850.33 करोड़ रुपए) का भुगतान किया जाएगा। कंपनी ने बयान में कहा कि इसके अलावा डीडब्ल्यूएस के शेयरधारकों को कंपनी द्वारा हाल में घोषित किए गए 0.03 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर प्रति शेयर का लाभांश भी दिया जाएगा।

एचसीएल टेक्नालॉजीज ने बताया कि डीडब्ल्यूएस के अधिग्रहण से ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में हो रही डिजिटल पहल में कंपनी का योगदान उल्लेखनीय रूप से बढ़ेगा और प्रमुख उद्योगों में एचसीएल का ग्राहक आधार मजबूत होगा। कंपनी ने बताया कि सौदे के लिए अभी नियामक मंजूरियां ली जानी बाकी हैं।

उम्मीद जताई जा रही है कि नियामक मंजूरियां मिलने के बाद दिसंबर 2020 तक अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। डीडब्ल्यूएस में 700 से अधिक कर्मचारी हैं और मेलबर्न, सिडनी, एडिलेड, ब्रिसबेन और कैनबरा में इसके कार्यालय हैं। कंपनी की आय वित्त वर्ष 2020 में 16.79 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर थी।

8. भारत में कोरोना मरीजों का रिकवरी रेट 80% के पार, 24 घंटों में ठीक हुए रिकॉर्ड मरीज

भारत में लगातार तीसरे दिन कोरोना वायरस (Coronavirus) के 90 हजार से अधिक मरीज ठीक हुए और इसके साथ ही इस महामारी से ठीक होने की दर (Recovery Rate) 80 प्रतिशत से अधिक हो गई है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सोमवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि पिछले चौबीस घंटे में 93,356 मरीज ठीक हुए हैं। मंत्रालय के अनुसार, बारह राज्यों और संघ शासित प्रदेशों में ठीक होने की दर राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है। कोविड-19 के मरीजों के ठीक होने के नए मामलों की संख्या का 79 प्रतिशत, दस राज्यों और संघ शासित प्रदेशों से है।

वक्तव्य में कहा गया कि ठीक होने वाले मरीजों की कुल संख्या अब 43,96,399 हो गई है और इस मामले में भारत वैश्विक स्तर पर शीर्ष पर है। यह आंकड़ा विश्व में कोविड-19 के ठीक होने वाले मरीजों की संख्या का 19 प्रतिशत से अधिक है।


9. 53 करोड़ पशुओं को AADHAR नंबर देगी सरकार

देश में पशुओं को भी आधार नंबर देने का कार्य तेजी से चल रहा है। सरकार ने योजना का विस्तार करते हुए भेड़, बकरी और सुअर को भी 'पशु आधार' देना शुरू किया है। जिससे अब देश में 53.5 करोड़ पशुओं को 12 अंकों का आधार कार्ड मिलेगा।

पशुओं और रोगों की पहचान सुनिश्चित सरकार का कहना है कि इससे कई तरह के लाभ होंगे। पशुओं और रोगों की पहचान सुनिश्चित होगी। 53.5 करोड़ पशुओं का आधार नंबर बन जाने के बाद भारत के पास पशुओं का सबसे बड़ा डेटाबेस होगा। इस डेटाबेस में पशुओं की नस्ल, दूध उत्पादन, कृत्रिम गर्भाधान टीकाकरण और पोषण से जुड़ी जानकारियां होंगी।

पशु संजीवनी योजना दरअसल, लोकसभा सांसद विनोद कुमार सोनकर, भोला सिंह, संगीता कुमारी सिंह देव, सुकांत मजूमदार, जयंत कुमार राय, राजा अमरेश्वर नाईक ने लोकसभा में रविवार को एक अतारांकित सवाल कर मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री से पूछा था कि क्या सरकार ने अंतरराष्ट्रीय संगठन के साथ परामर्श कर पशुओं को 12 अंकों की विशिष्ट पहचान संख्या(UID) देने काम काम शुरू किया है। इसके लिए क्या सरकार ने पशु संजीवनी योजना आरंभ की है?

पशु स्वास्थ्य के लिए सूचना प्रणाली विकसित इस सवाल का लिखित जवाब देते हुए मंत्री डॉ. संजीव कुमार बालियान (Sanjeev Kumar Balyan) ने कहा कि राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड ने पशु उत्पादकता और स्वास्थ्य के लिए सूचना प्रणाली विकसित की है। पशुओं को मिलने वाले 12 अंकों के विशिष्ट पहचान संख्या(UID) का उपयोग राष्ट्रीय डेटाबेस में हो रहा है। मंत्री ने बताया कि भारत सरकार पशुओं के वैज्ञानिक प्रजनन, रोगों के फैलाव को रोकने, दुग्ध उत्पादों का व्यापार बढ़ाने के उद्देश्य से 12 अंकों की विशिष्ट पहचान संख्या(पशु आधार) का उपयोग कर दुधारु गोवंशों और भैसों की पहचान कर रही है।

पशु संजीवनी घटक स्कीम के तहत लागू इसे पशु संजीवनी घटक स्कीम के तहत लागू किया जा रहा है, जिसे अब राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत शामिल किया गया। मंत्री ने बताया कि पशु आधार की सुविधा में अब भेड़, बकरी और सुअर को भी जोड़ा जा रहा है। इस प्रकार 53.5 करोड़ पशुओं को आधार नंबर दिया जा रहा है। सितंबर 20