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21st July | Current Affairs | MB Books


1. बाढ़ग्रस्त असम में राहत कार्य में भारत सरकार की मदद करने को तैयार संयुक्त राष्ट्र

संयुक्त राष्ट्र बाढ़ग्रस्त असम में राहत कार्यों के लिए मदद की दरकार होने पर भारत सरकार की सहायता के लिए पूरी तरह तैयार है। असम में बाढ़ के कारण लाखों लोग बेघर हो गए हैं और 100 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।

असम में बाढ़ से एक और व्यक्ति की मौत, 24 लाख से अधिक लोग प्रभावित

संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने सोमवार को कहा कि हमारे मानवीय कार्यों के लिए हमारे सहयोगियों ने बताया है कि भारत में असम और पड़ोसी देश नेपाल में मानसून की बारिश के कारण आई बाढ़ के कारण करीब 40 लाख लोग बेघर हो गए हैं और 189 लोगों की जान गई है।

उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र जरूरत पड़ने पर भारत सरकार की मदद को तैयार है। उन्होंने कहा कि नेपाल प्राधिकारियों ने तराई क्षेत्र के निचले इलाकों तथा नदी के तट पर रहने वाले लोगों से बाढ़ के खतरे के कारण सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है। असम में बाढ़ से तबाही, पीएम मोदी ने असम के सीएम से की बात

दुजारिक ने कहा कि प्रभावित इलाकों में पहुंच पाना एक बड़ी समस्या है। दूरदराज के इलाकों में भूस्खलन होने के कारण राहत एवं तलाश अभियान बाधित हो रहे हैं। विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) प्रभावित समुदायों तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है। उन तक पहुंचने के लिए हेलीकॉप्टर ही एकमात्र व्यवहार्य विकल्प है।

प्रवक्ता ने कहा कि हम नेपाल में सबसे संवेदनशील समुदायों को अतिरिक्त मानवीय सहायता मुहैया कराने के लिए भी तैयार हैं। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) ने बताया कि असम में बाढ़ के कारण 24 जिलों से 24.3 लाख से अधिक लोग बेघर हुए हैं। राज्य में इस साल बाढ़ और भूस्खलन से 111 लोगों की जान गई है।

इस बीच संयुक्त राष्ट्र के विश्व मौसम संगठन (डब्ल्यूएमओ) ने कहा है कि पूर्वी अफ्रीका, भारत और पाकिस्तान के कुछ हिस्सों में जलवायु परिवर्तन के कारण टिड्डी दल का हमला खाद्य सुरक्षा पर गंभीर खतरा पैदा कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र की विशेष एजेंसी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन जैसे कि रेगिस्तानी क्षेत्रों में तापमान और वर्षा में वृद्धि, और ऊष्णकटिबंधीय चक्रवातों से जुड़ी तेज हवाएं कीट प्रजनन, विकास और प्रवास के लिए एक नया वातावरण प्रदान करती हैं।


2. भारत-अमेरिका द्वारा PASSEX अभ्यास का आयोजन किया जा रहा है

अमेरिकी नौसेना के वाहक यूएसएस निमित्ज ने मध्य पूर्व में भारतीय युद्धपोतों के साथ समुद्री अभ्यास किया।

PASSEX अभ्यास एक ऐसे समय में किया जा रहा है जब भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव है।

मुख्य बिंदु

यूएसएस निमित्ज (दुनिया का सबसे बड़ा विमान वाहक) दक्षिण चीन सागर से अपने रास्ते पर था। नौसैनिक वाहक ने हाल ही में यूएसएस रोनाल्ड रीगन के साथ दक्षिण चीन सागर में आयोजित सैन्य अभ्यास में भाग लिया।

PASSEX

भारतीय नौसेना ने जापान मैरिटाइम सेल्फ डिफेंस फोर्स और फ्रांसीसी नौसेना के साथ इसी तरह का PASSEX संचालित किया है। PASSEX एक Passage Exercise है।

महत्त्व

समान विचार वाली नौसेनाओं के साथ लगातार अभ्यास करना अच्छा है। यह विनिमय के अवसरों में मदद करेगा। मालाबार अभ्यास आमतौर पर भारत, जापान और अमेरिका के बीच होता है। इस साल ऑस्ट्रेलिया के तिकड़ी में शामिल होने की संभावना है।

जापान मैरिटाइम सेल्फ डिफेंस फोर्स

यह जापान की नौसेना है। इसका गठन द्वितीय विश्व युद्ध के बाद किया गया था। इसमें 154 जहाजों और 346 विमानों का बेड़ा है। 2000 के बाद से, यह दुनिया की चौथी सबसे बड़ी नौसेना है।


3. CBDT ने वित्त वर्ष 2018-19 के लिए आयकर के स्वैच्छिक अनुपालन के लिए शुरू किया ई-अभियान

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए आयकर के स्वैच्छिक अनुपालन के लिए एक ई-अभियान शुरू किया है। यह अभियान 20 जुलाई से 31 जुलाई, 2020 के बीच कुल 11 दिनों तक चलेगा।

करदाताओं की सुविधा के लिए यह 11 दिवसीय ई-अभियान शुरू किया गया है। यह उन करदाताओं और आकलनकर्ताओं पर ध्यान केंद्रित करेगा जो वित्त वर्ष 2018-19 के लिए नॉन-फाइलर्स हैं या उनके रिटर्न में विसंगतियां/ कमियां हैं।

उद्देश्य

इस ई-अभियान का मुख्य उद्देश्य करदाताओं को आयकर विभाग के पास उपलब्ध अपने वित्तीय लेनदेन से संबंधित जानकारी की पुष्टि करने में मदद करना है। यह वित्त वर्ष 2018-2019 के लिए कर निर्धारितियों पर लागू होता है। यह अभियान नोटिस और जांच प्रक्रिया से बचने के लिए स्वैच्छिक अनुपालन को सक्षम करने का प्रयास करता है।

लाभ

करदाताओं को लाभ पहुंचाने के लिए यह ई-अभियान शुरू किया गया है। इस अभियान के तहत, आईटी विभाग उन करदाताओं की पहचान करने के लिए ईमेल और एसएमएस भेजेगा, जिनके ऐसे वित्तीय लेनदेन से संबंधित जानकारी को सत्यापित करने के लिए होगा, जो आईटी विभाग द्वारा विभिन्न स्रोतों जैसेकि, टैक्स डिडक्शन एट सोर्स (टीडीएस), स्टेटमेंट ऑफ फाइनेंशियल ट्रांजैक्शंस (एसएफटी), टैक्स कलेक्शन एट सोर्स (TCS) और फॉरेन रिमिटेंस (फॉर्म 15CC) से प्राप्त किये गये थे।

मुख्य विशेषताएं

इस ई-अभियान के तहत, करदाता एक निर्दिष्ट पोर्टल पर अपने उच्च मूल्य लेनदेन के बारे में ऑनलाइन जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।

करदाताओं को किसी भी आयकर कार्यालय में जाने की आवश्यकता नहीं होगी, क्योंकि उन्हें अपनी प्रतिक्रिया ऑनलाइन जमा करनी होगी।

वे निम्नलिखित विकल्पों में से किसी एक का चयन करके अपनी प्रतिक्रिया ऑनलाइन प्रस्तुत कर सकेंगे:

(i) सूचना सही है

(ii) सूचना पूरी तरह से सही नहीं है

(iii) किसी अन्य व्यक्ति/ वर्ष से संबंधित जानकारी

(iv) सूचना डुप्लिकेट/ अन्य प्रदर्शित जानकारी में शामिल है

(v) सूचना अस्वीकृत है

I-T विभाग के डाटा विश्लेषण से यह पता चला था कि उच्च मूल्य लेनदेन वाले कुछ करदाताओं ने आकलन वर्ष 2019-20 (वित्त वर्ष 2018-19 के लिए प्रासंगिक) के लिए रिटर्न दाखिल नहीं किया है।

इस विश्लेषण से रिटर्न फाइलरों के एक और ऐसे समूह का भी पता लगा, जिनके उच्च मूल्य के लेनदेन उनके आयकर रिटर्न के अनुरूप नहीं थे।

पृष्ठभूमि

इस आकलन वर्ष 2019-20 (वित्त वर्ष 2018-19 के लिए प्रासंगिक) के लिए आयकर रिटर्न भरने और संशोधित करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई, 2020 है। आईटी विभाग ने करदाताओं से अपनी सहजता और लाभ के लिए ई-अभियान में भाग लेने का अनुरोध किया है।


4. केंद्र सरकार ने 20 जुलाई से उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 लागू किया

इस 20 जुलाई, 2020 से उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 लागू हो गया है। केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री, रामविलास पासवान ने कहा कि, यह नया कानून उपभोक्ताओं को सशक्त बनायेगा।

यह नया कानून अपने अधिसूचित नियमों और उपभोक्ता विवाद निवारण आयोगों, उपभोक्ता संरक्षण परिषदों, उत्पाद देयता, मध्यस्थता और मिलावटी सामान से बने उत्पादों के निर्माण या बिक्री के लिए सजा जैसे विभिन्न प्रावधानों के माध्यम से उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा करेगा।

केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि इस अधिनियम में उपभोक्ताओं के अधिकारों की सुरक्षा, संवर्धन और इन अधिकारों को लागू करने के लिए केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) की स्थापना करना भी शामिल है।

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019: मुख्य विशेषताएं

ई-कॉमर्स प्लेटफार्मों द्वारा अनुचित व्यापार प्रथाओं की रोकथाम के लिए आवश्यक नियम इस अधिनियम के तहत कवर किए जाएंगे।

प्रत्येक ई-कॉमर्स इकाई को धनवापसी, वापसी, वारंटी और गारंटी, विनिमय, वितरण और शिपमेंट, शिकायत निवारण तंत्र, भुगतान के तरीके, भुगतान के साधन, भुगतान के तरीकों की सुरक्षा और शुल्क-वापसी के विकल्प सहित संबद्ध वस्तु के मूल देश के बारे में जानकारी देनी होगी, जो उपभोक्ताओं को उनके प्लेटफॉर्म पर खरीद के पहले चरण में सूचित निर्णय लेने में सक्षम बनाने के लिए आवश्यक होगा।

मध्यस्थता प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए इस नए अधिनियम के तहत मध्यस्थता का एक वैकल्पिक विवाद तंत्र भी प्रदान किया गया है। मध्यस्थता के लिए एक उपभोक्ता आयोग को शिकायत सौंपी जायेगी, जहां शुरुआती निपटान की गुंजाइश मौजूद होगी और दोनों/ सभी पार्टियां इसके लिए सहमत हों।

उपभोक्ता आयोगों के तहत स्थापित विभिन्न मध्यस्थता सेल्स में यह मध्यस्थता वार्ता की जाएगी। ऐसी मध्यस्थता के माध्यम से निपटान के खिलाफ कोई अपील नहीं होगी।

उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के नियमों के अनुसार, कुल 5 लाख रुपये तक के मामले दर्ज करने के लिए कोई शुल्क नहीं देना होगा।

CCPA का उद्देश्य:

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) को उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन के साथ-साथ संस्थान के मुकदमों या शिकायतों की जांच करने का भी अधिकार होगा। यह भ्रामक विज्ञापनों और अनुचित व्यापार प्रथाओं को रोकने का आदेश भी दे सकता है, असुरक्षित वस्तुओं और सेवाओं की वापसी का आदेश दे सकता है, निर्माताओं या प्रकाशकों या भ्रामक विज्ञापनों के समर्थन करने वालों पर जुर्माना भी लगा सकता है।

उपभोक्ताओं को लाभ

सभी उत्पादों में मिलावट और भ्रामक विज्ञापनों को रोकने के लिए कठोर सजा का प्रावधान।

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) के माध्यम से प्रदान किए जाने वाले तीव्र क्रियान्वयन उपाय।

उत्पाद दायित्व का प्रावधान निर्माताओं और सेवा प्रदाताओं को अपूर्ण सेवाओं और दोषपूर्ण उत्पाद उपलब्ध करवाने से रोकना है।

उपभोक्ता आयोगों में अपील करना आसान होगा और अधिनिर्णयन प्रक्रिया को भी सरल बनाया गया है।

इस कानून के तहत, मध्यस्थता के माध्यम से विभिन्न मामलों के शीघ्र निपटान की गुंजाइश है।

नए युग के उपभोक्ता मुद्दों जैसेकि, प्रत्यक्ष बिक्री और ई-कॉमर्स के लिए नियमों का भी प्रावधान है।

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019: पृष्ठभूमि

यह उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 पिछले उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 को निरस्त और प्रतिस्थापित करता है। केंद्री