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12th November | Current Affairs | MB Books


1. 12 नवम्बर : विश्व निमोनिया दिवस

प्रतिवर्ष 12 नवम्बर को विश्व निमोनिया दिवस मनाया जाता है, इस दिवस को वर्ष 2009 से प्रतिवर्ष मनाया जा रहा है। इस दिवस को पहली बार ‘ग्लोबल कोएलिशन अगेंस्ट चाइल्ड निमोनिया’ द्वारा 2009 में मनाया गया था। इस गटबंधन में CARE, सेव द चिल्ड्रेन, PATH, यूनिसेफ, WHO इत्यादि शामिल हैं।

उद्देश्य

नियोमिया के बारे में जागरूकता फैलाना, 5 वर्ष से कम की आयु के बच्चों में मृत्यु का एक बड़ा कारण निमोनिया है।

निमोनिया का मुकाबला करने के लिए एक्शन प्लान बनाना।

निमोनिया की रोकथाम व उपचार सुनिश्चित करना।

GAPPD

Global Action Plan for Prevention and Control of Pneumonia and Diarrhea (GAPPD) को विश्व स्वास्थ्य संगठन तथा यूनिसेफ द्वारा लांच किया गया था। इस कार्यक्रम का उद्देश्य निमोनिया नियंत्रण में तीव्रता लाना है।

भारत में निमोनिया

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, भारत में हर पांच में से एक बच्चा निमोनिया से प्रभावित है। 2018 में, निमोनिया से 1,27,000 से अधिक बच्चे मारे गए थे।

भारत में निमोनिया का टीका

जुलाई 2020 में, ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने पहले स्वदेशी रूप से विकसित निमोनिया वैक्सीन को मंजूरी दी। इसे Serum Institute of India Limited द्वारा विकसित किया गया था।

भारत की योजनायें

केन्द्रीय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय ने MAA, UIP, ICDS पहलों के तहत निमोनिया को समाप्त करने के लिए कार्यक्रम लांच किये हैं।

केंद्र सरकार आशा कार्यकर्ताओं तथा आगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से निमोनिया के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए कार्य कर रही है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत में प्रतिवर्ष निमोनिया के कारण 3 लाख लोगों की मौतें होती हैं।


2. चीन ने लॉन्च किया दुनिया का पहला 6G एक्सपेरिमेंटल सॅटॅलाइट'

चीन ने दुनिया के पहले 6G एक्सपेरिमेंटल उपग्रह को अंतरिक्ष में भेजा है।

यह 6G उपग्रह उन तीन चीनी उपग्रहों में से एक था, जिसे अर्जेंटीना की कंपनी सैटलॉजिक द्वारा विकसित 10 वाणिज्यिक रिमोट सेंसिंग उपग्रह के साथ सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया था।

यह चीन की लॉन्ग मार्च श्रृंखला का 351 वां रॉकेट था।

रिपोर्टों के अनुसार, यह तकनीक 5G की तुलना में 100 गुना तेज होने की उम्मीद है।

6G संचार परीक्षण उपग्रह को 12 अन्य उपग्रहों के साथ कक्षा में लॉन्च किया गया था।

उपग्रह में प्रौद्योगिकी भी है जो फसल आपदा निगरानी और जंगल की आग की रोकथाम के लिए उपयोग की जा सकेगी।


3. आपरेशन ग्रीन योजना: केंद्र ने पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों से होने वाले हवाई परिवहन पर 50 प्रतिशत सब्सिडी की घोषणा की

केंद्र सरकार ने अब पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों से 41 अधिसूचित फलों और सब्जियों को भारत के किसी भी स्थान पर पहुंचाने के लिए हवाई परिवहन पर 50 प्रतिशत सब्सिडी सुविधा देने की 11 नवंबर 2020 को घोषणा की। कोरोना संक्रमण के चलते उद्यानिकी की खेती करने वाले कृषकों को आर्थिक नुकसान से बचाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा आपरेशन ग्रीन योजना के दायरे को बढ़ाया गया है।

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय की एक विज्ञप्ति के मुताबिक आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत ऑपरेशन ग्रीन्स योजना के तहत शुरू की गयी इस सुविधा के अनुसार एयरलाइंस कम्पनियां आपूर्तिकर्ता / माल भेजने वाले / माल प्राप्तकर्ता तथा एजेंट को परिवहन सब्सिडी सीधे प्रदान करेंगी और वास्तविक अनुबंधित माल ढुलाई शुल्क का केवल 50 प्रतिशत ही उनसे लेंगी।

योजना को मंजूरी प्रदान करने के बाद संशोधित योजना सम्बंधित दिशा-निर्देश 02 नवंबर 2020 को अधिसूचित कर दिए गए। ऑपरेशन ग्रीन्स योजना के तहत परिवहन सब्सिडी को इससे पहले किसान रेल योजना पर लागू किया गया था जो 12 अक्टूबर 2020 से प्रभावी हुई थी।

योजना के तहत 21 फलों को शामिल किया गया

भारतीय रेलवे अधिसूचित फल और सब्जियों पर केवल 50 प्रतिशत भाड़ा ही लेता है। इस योजना के तहत 21 फलों में आम, केला, अमरूद, कीवी, लीची, मौसम्बी, संतरा, किन्नु, नींबू, पपीता, अनानास, अनार, कटहल, सेब, बादाम, आंवला, पैशन फ्रूट, नाशपाती, शकरकंद और चीकू हैं। 20 सब्जियां में फ्रेंच बीन्स, करेला, बैंगन, शिमला मिर्च, गाजर, फूलगोभी, मिर्च (हरी), ओकरा, ककड़ी, मटर, लहसुन, प्याज, आलू, टमाटर, बड़ी इलायची, कद्दू, अदरक, गोभी, स्क्वैश और हल्दी (सूखी) को रखा गया है।

50 प्रतिशत सब्सिडी की घोषणा

इसमें पूर्वोत्तर से अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम (बागडोगरा) और त्रिपुरा के सभी हवाई अड्डे तथा हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड एवं केंद्रशासित प्रदेशों जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख के सभी हवाई अड्डों से इन फल/सब्जियों की ढुलाई को इस योजना के तहत सब्सिडी के दावे का पात्र माना जाएगा।

आपरेशन ग्रीन योजना: एक नजर में

केंद्र सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय द्वारा आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत आपरेशन ग्रीन योजना संचालित की गई है। इसके तहत उत्पादकों को फल एवं सब्जियों का उचित मूल्य दिलाने के लिए 500 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इस योजना में टमाटर, प्याज व आलू के साथ ही सभी फल व सब्जियों के अधिक उत्पादन होने पर बाजारों में परिवहन के माध्यम से भेजने पर कुल लागत का 50 प्रतिशत अनुदान के रूप में किसानों को मिलेगा।

यहीं नहीं इस योजना का लाभ उन किसानों को भी मिलेगा जो फल या सब्जी को कोल्ड स्टोरेज में या अन्य किसी वेयरहाउस में भंडारित करेंगे। उनके लिए भंडार शुक्ल की कुल लागत का 50 प्रतिशत अनुदान की व्यवस्था की गई है। इस योजना में आलू, प्याज, टमाटर के साथ अब विभिन्न प्रकार के फलों और सब्जियों को भी शामिल करने की घोषणा आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तीसरे भाग में की गई है।


4. समुद्र में बढ़ी भारत की ताकत, नौसेना में शामिल हुई पनडुब्बी 'आईएनएस वागिर'

केंद्रीय आयुष और रक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीपद नाइक ने मुंबई के मझगांव डॉक पर 5वीं स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बी 'आईएनएस वागिर' को लांच किया। इससे समुद्र में भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ेगी। खबरों के अनुसार, केंद्रीय राज्यमंत्री श्रीपद नाइक ने गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अरब महासागर में पनडुब्बी 'आईएनएस वागिर' को लांच किया। पनडुब्बी का निर्माण रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स द्वारा किया गया था। पनडुब्बियों के लिए प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पर फ्रेंच सहयोगी नौसेना समूह के साथ काम कर रहा था, इस सौदे के साथ 23 हजार करोड़ रुपए से अधिक की कीमत थी।

आईएनएस कलवरी, छह स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बियों में से पहली, 2015 में शुरू की गई थी। एमडीएल देश के प्रगतिशील स्वदेशी युद्धपोत निर्माण कार्यक्रम में हमेशा सबसे आगे रहा है।


5. भारत और मालदीव ने चार समझौतों पर किए हस्ताक्षर

भारत और मालदीव के बीच विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला की मालदीव यात्रा के दौरान चार समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।

श्रृंगला हिंद महासागर द्वीपसमूह की दो दिवसीय यात्रा पर है।

ये समझौता ज्ञापन दोनों देशों के बीच संबंधों को बेहतर बनाने में मदद करेंगे। मालदीव पर्यटन उद्योग COVID-19 से बहुत बुरी तरह प्रभावित हुआ है और इस वजह से भारत ने सितंबर 2020 में मालदीव को 250 मिलियन अमेरिकी डॉलर का ऋण प्रदान किया है।

भारतीय विदेश सचिव ने मालदीव की "इंडिया फर्स्ट" नीति की सराहना की और यह भी कहा कि यह भारत की "नेबरहुड फर्स्ट" पॉलिसी जैसी है।

भारत द्वारा 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर का अनुदान दिया गया, जो ग्रेटर माले कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट (GMCP) के लिए भारत के "500 मिलियन अमेरिकी डॉलर पैकेज" का हिस्सा है, जो कि कैपिटल माले को तीन द्वीपों से जोड़ेगा। इसके अलावा भारत ने मालदीव को इस तरह का सबसे बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर फंड EXIM के जरिए 400 मिलियन डॉलर का ऋण देगा।

दोनों देशों के बीच दूसरा समझौता 1.71 मिलियन मालदीवियन रूफियाओं के अनुदान के साथ संयंत्र और मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित करने के लिए किया गया है।

तीसरे समझौते पर 7.7 मिलियन मालदीवियन रूफियाओं के एक और अनुदान के साथ एक ड्रग डिटॉक्स सुविधा केंद्र की स्थापना के लिए हस्ताक्षर किए गए हैं।

चौथे एमओयू पर दोनों देशों के बीच खेल और युवा मामलों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए हस्ताक्षर किए गए थे।


6. दिल्ली सरकार ने ‘रेड लाइट आन, गाड़ी आफ’ अभियान 30 नवम्बर तक बढ़ाया

दिल्ली सरकार ने 11 नवंबर 2020 को प्रदूषण की स्थिति को देखते हुए इसे 30 नवम्बर तक बढ़ाने का फैसला किया है। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा कि आप सरकार ने वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए ‘रेड लाइट आन, गाड़ी आफ’ अभियान को 30 नवम्बर तक बढ़ाने का फैसला किया है।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 21 अक्टूबर को इस अभियान की शुरुआत करते हुए कहा था कि यदि शहर में 10 लाख वाहन भी इस अभियान में शामिल हो जाते हैं, तो एक वर्ष में पीएम 10 का स्तर 1.5 टन और पीएम 2.5 का 0.4 टन कम हो जाएगा। 21 अक्टूबर से शुरू किया गया अभियान 15 नवंबर को समाप्त होने वाला है। इसे बढ़ाकर 30 नवंबर कर दिया गया है।

अभियान का उद्देश्य

इस अभियान का मुख्य उद्देश्य रेड लाइट पर खड़े वाहनों को बंद कर 15 से 20 प्रतिशत प्रदूषण को कम करना है। दिल्ली को वाहनों के धुएं से होने वाले प्रदूषण से बचाने के लिए सरकार की ओर से 'रेड लाइट ऑन, गाड़ी ऑफ' अभियान शुरू किया गया है।

ढाई हजार मार्शल नियुक्त

अभियान के दूसरे चरण में भी पहले की तरह लोगों को जागरूक करने हेतु ढाई हजार मार्शल नियुक्त किए जाएंगे। ढाई हजार मार्शल पहले फेज की तरह 11 जिलों के 100 अलग-अलग चैराहे पर नियुक्त किए जाएंगे। मुख्य 10 चैराहों पर 20-20 पर्यावरण मार्शल नियुक्त होंगे। एसडीएम, एसीपी, ट्रैफिक पुलिस का संयुक्त निगरानी का तंत्र दूसरे चरण के अंदर भी जारी रहेगा।

पर्यावरण मंत्री ने क्या कहा?

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि अभियान को 15 नवंबर तक जारी रखा जाना था। हालांकि, दिल्ली सरकार ने प्रदूषण की स्थिति को देखते हुए इसे 30 नवम्बर तक बढ़ाने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि इसे अभियान का 'चरण 2' कहा जाएगा। राय ने इससे पहले कहा था कि रेड लाइट पर इंतजार करने के दौरान वाहनों का इंजन बंद कर देने से वाहनों से होने वाले प्रदूषण में 15 से 20 प्रतिशत की कमी हो सकती है।

पटाखों की बिक्री पर है पूर्ण प्रतिबंध

दिल्ली सरकार ने 05 नवंबर 2020 को 30 नवंबर तक शहर में सभी प्रकार के पटाखों की बिक्री और उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया था। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने भी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में 09 नवंबर की आधी रात से 30 नवंबर की मध्यरात्रि तक सभी प्रकार के पटाखों की बिक्री या उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था।

पराली को लेकर लिया गया ये अहम फैसला

पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा कि दिल्ली में खुले में पराली जलाने में कमी लाने के लिए ‘पूसा बायो-डीकंपोजर’ सॉल्यूशन की प्रभावशीलता का पता लगाने के लिए गठित 15 सदस्यीय समिति आज (12 नवम्बर 2020) को अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपेगी। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा के वैज्ञानिकों के अनुसार यह सॉल्यूशन 15 से 20 दिनों में पराली को खाद में बदल सकता है और इसलिए इससे पराली जलाने पर रोक लगेगी।

पृष्ठभूमि

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में प्रदूषण को कम करने के उद्देश्य से ‘युद्ध, प्रदूषण के विरुद्ध’ अभियान की शुरुआत की है। इस अभियान के अंतर्गत कई गतिविधियां शुरू की गई है। पर्यावरण मार्शल वाहन चालकों को रेड लाइट पर खड़े रहने के दौरान अपने वाहन बंद रखने की अपील कर रहे हैं। दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण पर गोपाल राय ने कहा कि दिल्ली सरकार से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक और ईपीसीए से लेकर सभी वैज्ञानिक, डीपीसीसी के लोग प्रदूषण पर निगरानी रख रहे हैं।


7. ‘Scooby-Doo’ के सह-निर्माता केन स्पीयर्स का निधन

अमेरिकी टेलीविजन संपादक, लेखक और निर्माता केन स्पीयर्स, जो लोकप्रिय एनिमेटेड सीरिज “Scooby-Doo” के सह-निर्माता थे, का निधन।

वह दिवंगत जो रूबी की टेलीविजन एनीमेशन प्रोडक्शन कंपनी, रूबी-स्पीयर्स प्रोडक्शंस के सह-संस्थापक भी थे।

स्पीयर्स और रूबी ने साथ में मिलकर Scooby-Doo, Dynomutt, Dog Wonder, and Jabberjaw जैसे कई अन्य कार्यक्रमों भी बनाए थे। जो रूबी का हाल ही में 26 अगस्त 2020 को निधन हो गया था।


8. उत्तराखंड के BJP विधायक सुरेंद्र सिंह जीना का Corona से निधन

कोरोनावायरस (Coronavirus) का संक्रमण दिन-ब-दिन खतरनाक होता जा रहा है। इस बीच उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले से भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह जीना का कोरोना संक्रमण के चलते निधन हो गया। विधायक जीना का दिल्ली के गंगाराम अस्पताल में इलाज चल रहा था। खबरों के मुताबिक, भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह जीना कोरोनावायरस के संक्रमण से ग्रसित हो गए थे। उनका दिल्‍ली के गंगाराम अस्पताल में उपचार चल रहा था, जहां उनकी हालत नाजुक बनी हुई थी। इलाज के दौरान गुरुवार को उन्होंने अंतिम सांस ली। विधायक सुरेंद्र सिंह के निधन को उत्तराखंड भाजपा के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। कुछ दिन पहले ही उनकी पत्नी का भी दिल का दौरा पड़ने से दुखद निधन हो गया था। उल्‍लेखनीय है कि उत्तराखंड में भाजपा के युवा विधायक सुरेंद्र सिंह जीना साल 2006 में कुमाऊं मंडल विकास निगम के अध्यक्ष रह चुके थे। वे साल 2007 में पहली बार भिक्क्यासैंण सीट से विधानसभा पहुंचे। साल 2012 के चुनाव में वे दूसरी बार साल्ट विधानसभा से विजयी हुए, जबकि 2017 में वे तीसरी बार इसी विधानसभा से चुने गए।


9. जाने-माने गुजराती कोलमनिस्ट कार्लोस गोंजालेज वैलेज एसजे का निधन

लेखक और गुजराती स्तंभकार, फादर कार्लोस गोंजालेज वैलेज एसजे (Carlos Gonzalez Valles SJ) का निधन।

जेसुइट पादरी का जन्म स्पेन में हुआ था, वह गणित के शिक्षक थे। उन्होंने गुजराती, अंग्रेजी और स्पेनिश में लिखा करता थे।

उन्होंने कई गणितीय अवधारणाओं का गुजराती में अनुवाद किया और शब्द गढ़े। वह फादर वाल्स के नाम से जाने जाते हैं।

10. झारखंड सरकार ने 'सरना आदिवासी धर्म कोड' का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया

झारखंड विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र में 11 नवंबर 2020 को 'सरना आदिवासी धर्म कोड' का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। इसे अब राज्य सरकार केन्द्र के पास विचार के लिए भेजेगी। इससे साल 2021 की जनगणना में सरना आदिवासी धर्म कोड का अलग से कॉलम शामिल किया जा सकेगा।

राज्य सरकार द्वारा 11 नवंबर 2020 को बुलाये गये झारखंड विधानसभा के विशेष सत्र में विपक्ष के कुछ संशोधनों के साथ सरना आदिवासी धर्म कोड का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि राज्य सरकार अब यह प्रस्ताव केंद्र सरकार को शीघ्र भेजकर 2021 की जनगणना में सरना आदिवासी धर्म कोड का अलग कॉलम शामिल करने का अनुरोध करेगी।

सरना आदिवासी धर्म कोड का प्रस्ताव पारित

झारखंड विधानसभा से संशोधन के बाद सरना आदिवासी धर्म कोड का प्रस्ताव पारित हो गया। चर्चा के दौरान विधानभा का विशेष सत्र हंगामेदार रहा। अब सरना आदिवासी धर्म कोड के पारित प्रस्ताव को केंद्र सरकार को भेजा जायेगा। मुख्य विपक्षी भारतीय जनता पार्टी की तरफ से पूर्व विधानसभाध्यक्ष सीपी सिंह एवं नीलकंठ सिंह मुंडा ने प्रस्ताव पारित करने से पूर्व इस पर समग्र चर्चा कराये जाने की मांग की जिस पर विधानसभाध्यक्ष भी हीलाहवाली करते नजर आये।

सरना धर्म कोड से मिलेंगे कई लाभ

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विशेष सत्र के दौरान कहा कि जनसंख्या में कमी के कारण झारखंड के आदिवासियों को मिलनेवाले संवैधानिक अधिकारों पर असर पड़ता है। झारखंड के आधिवासियों को सरना धर्म कोड मिल जाने के बाद इन्हें कई फायदे मिलेंगे।

आदिवासी जनसंख्या की वृद्धि दर काफी कम

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि आदिवासियों की जनसंख्या लगातार कम हो रही है। जनगणना के आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि झारखंड में गैर आदिवासियों की तुलना में आदिवासी जनसंख्या की वृद्धि दर काफी कम है।

जनगणना के समय पलायन

प्रत्येक दस साल पर जनगणना होती है, लेकिन जनगणना के दौरान आदिवासी अपने इलाके में नहीं रहते। राज्य से पलायन कर जाने के कारण उनकी जनगणना नहीं हो पाती।

सरना धर्म कोड

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विधानसभा के विशेष सत्र में कहा कि सरना धर्म कोड आदिवासियों के लिए महत्वपूर्ण है। इससे झारखंड के आदिवासियों को कई लाभ मिलेंगे।

सरना धर्म कोड की मांग को लेकर गंभीरता

झारखंड के इतिहास में पहली बार सरना धर्म कोड को लेकर विधानसभा के विशेष सत्र का आयोजन किया गया है। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सरना धर्म कोड की मांग को लेकर गंभीरता दिखायी है। झारखंड के आदिवासियों की प्रमुख मांगों में से ये महत्वपूर्ण मांग है।

पृष्ठभूमि

झारखंड के आदिवासियों के लिए सरना धर्म कोड की मांग काफी पुरानी है। इसको लेकर समय-समय पर राजनीतिक व सामाजिक संगठनों ने अपनी आवाज उठायी है। आदिवासी संगठन इस मांग को लेकर लंबे समय से संघर्षरत हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इसे लेकर पहल की है।

11. देश में FASTag यूजर्स की संख्या 2 करोड़ के पार

देश में डिजिटल तरीके से टोल प्लाजा के भुगतान के लिए शुरू की गई फास्टैग (FASTag) प्रणाली का इस्तेमाल करने वाले यूजर्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है और यह संख्या दो करोड़ को पार पहुंच गई है।

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने बुधवार को यहां बताया कि फास्टैग पंजीकरण में तेजी से बढ़ रही है और इसमें हर साल चार सौ प्रतिशत की दर से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। इस प्रणाली से कोरोनाकाल में लागू सामाजिक दूरी के नियम का भी टोल प्लाजा पर पालन किया जा रहा है।

एनएचएआई के अनुसार टोल प्लाजा संग्रहण में भी फास्टैग के प्रयोग से बढ़ोतरी हुई है। एक साल पहले फास्टैग के माध्यम से 70 करोड़ रुपए प्रतिदिन का संग्रहण हो रहा था जो बढ़कर अब 92 करोड़ रुपए प्रतिदिन हो गया है। फास्टैग प्रणाली से टोल प्लाजा पर 75 फ़ीसदी तक का संग्रहण किया जा रहा है।प्राधिकरण का कहना है कि वह राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रा को सुगम और सरल बनाना चाहता है और इसी क्रम में उसने टोल प्लाजा पर फास्टैग प्रणाली की शुरुआत की है जिसके अच्छे परिणाम सामने आ रहे हैं।


12. 12 नवम्बर : जन प्रसारण दिवस

प्रतिवर्ष 12 नवम्बर को जन प्रसारण दिवस मनाया जाता है। इस दिन 1947 में महात्मा गाँधी पहली बार आल इंडिया रेडियो के स्टूडियो में आये थे। उन्होंने स्टूडियो से विस्थापित लोगों को संबोधित किया था। इस दिवस को वर्ष 2000 में जन प्रसारण दिवस घोषित किया गया था।

आल इंडिया रेडियो

8 जून, 1936 को आल इंडिया रेडियो अस्तित्व में आया था। आल इंडिया रेडियो का आदर्श वाक्य “ बहुजन हिताय बहुजन सुखाय” है। आल इंडिया रेडियो के 414 स्टेशन है, यह 23 भाषाओँ तथा 179 बोलियों में कार्यक्रम का प्रसारण करता जाता है।

आल इंडिया रेडियो भारत का राष्ट्रीय रेडियो प्रसारक है। यह देश के लोगों के लिए सूचना, शिक्षा तथा मनोरंजन का महत्वपूर्ण साधन है।

प्रसार भारती

प्रसार भारती 23 नवम्बर, 1997 को अस्तिव में आया था। यह वैधानिक स्वायत्त संस्था है, इसकी स्थापना प्रसार भारतीय अधिनियम के तहत की गयी है। प्रसार भारती भारत का लोक सेवा प्रसारक है।

डीडी फ्री डिश प्रसार भारती की सेवा है, इसके द्वारा लोग व्यक्तिगत लघु डिश ऐन्टेना के द्वारा टीवी सेवा का लाभ प्राप्त कर सकते हैं। DTH सेवा के लिए स्थानीय केबल ऑपरेटर की आवश्यकता नहीं होगी।


13. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 10 क्षेत्रों के लिए PLI योजना को मंजूरी दी

11 नवंबर, 2020 को पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दस क्षेत्रों के लिए उत्पादन लिंक्ड प्रोत्साहन योजना (Production Linked Incentive Scheme) को मंजूरी दी। यह योजना 1.46 लाख करोड़ रुपये की हैं। भारत सरकार ने पहले फार्मास्यूटिकल्स और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के लिए योजना की घोषणा की थी।

मुख्य बिंदु

इस योजना के तहत, केंद्र सरकार अतिरिक्त उत्पादन के आधार पर प्रोत्साहन प्रदान करेगी। इससे भारत के निर्यात को बढ़ाने में मदद मिलेगी।

कैबिनेट द्वारा निम्नलिखित मंज़ूरी दी गयी है :

  • एडवांस केमिस्ट्री सेल बैटरी निर्माण क्षेत्र को 18,100 करोड़ रुपये प्राप्त होंगे।इसे नीति आयोग और भारी उद्योग विभाग द्वारा लागू किया जायेगा।

  • इलेक्ट्रॉनिक प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद निर्माण उद्योगों को 5,000 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन मिलेगा।इसे इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा लागू किया जायेगा।

  • ऑटोमोबाइल्स और ऑटो कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री को 57,042 रुपये का प्रोत्साहन मिलेगा।भारी उद्योग विभाग इस योजना को लागू करेगा।

  • दूरसंचार और नेटवर्किंग उत्पादों को 12,195 करोड़ रुपये प्राप्त होंगे।इस योजना को फार्मास्युटिकल विभाग द्वारा लागू किया जायेगा।

  • टेक्सटाइल प्रोडक्ट्स बनाने वाले उद्योगों को 10,683 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन मिलेगा।इसे वस्त्र मंत्रालय द्वारा लागू किया जायेगा।

  • खाद्य उत्पाद निर्माण उद्योग को 10,900 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन प्राप्त होगा।इसे खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय द्वारा लागू किया जायेगा।

  • उच्च दक्षता वाले सौर पीवी मॉड्यूल विनिर्माण उद्योगों को 4,500 करोड़ रुपये का इंसेंटिव प्राप्त होगा।इसे नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा लागू किया जायेगा।

  • व्हाइट गुड्स विनिर्माण उद्योगों को 6,238 करोड़ रुपये का इंसेंटिव मिलेगा।इसे उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग द्वारा लागू किया जायेगा।

  • विशेष इस्पात क्षेत्र के उद्योगों को 6,322 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन मिलेगा।इसे इस्पात मंत्रालय द्वारा लागू किया जायेगा।

पृष्ठभूमि

इस योजना का उद्देश्य भारत की विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाना है। मोटर वाहन उद्योग को अधिकतम इंसेंटिव प्राप्त हुआ क्योंकि यह COVID-19 के कारण प्रमुख रूप से प्रभावित हुआ है।


14. कपड़ा मंत्रालय ने “Local4Diwali” अभियान शुरू किया

केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय ने दिवाली के लिए एक अभियान “Local4Diwali”। शुरू किया है। यह अभियान भारतीय हस्तकला को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया है जो देश की सांस्कृतिक विरासत है और कई लोगों की आजीविका का स्रोत भी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, हस्तशिल्प क्षेत्र महिला सशक्तीकरण का एक प्रमुख क्षेत्र है क्योंकि लगभग 55% श्रमिक और कारीगर महिलाएं हैं।

#Local4Diwali अभियान का उद्देश्य

#Local4Diwali का मुख्य उद्देश्य लोगों को इस दिवाली पर भारतीय हस्तशिल्प उत्पादों को खरीदने और उपहार देने का आग्रह करना है।

इस अभियान का मूल उद्देश्य भारतीय हस्तशिल्प और कारीगरों को बढ़ावा देना है।

कपड़ा मंत्रालय की अपील

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से भारतीय हस्तशिल्प का उपयोग करने और इसे बढ़ावा देने का भी आग्रह किया है।

कपड़ा मंत्रालय ने लोगों को एक साथ आने और स्थानीय कपड़ा और हस्तकला व्यवसाय के लिए समर्थन दिखाने के लिए कहा है।

इस दिवाली पर अपने प्रिय लोगों के लिए उपहार में दीये, घर की सजावट का सामान जैसे पर्दे, बेड शीट या अन्य दस्तकारी का सामान दें।हर खरीद मायने रखती है!

स्थानीय हस्तशिल्प की बिक्री को प्रोत्साहित करने के लिए, फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम आदि प्लेटफार्मों पर पोस्ट को हैशटैग # Local4Diwali के साथ साझा करें।

अपने पसंदीदा हस्तशिल्प उत्पाद की तस्वीर लें और दूसरों को टैग करते हुए तस्वीर पोस्ट करें।

यह अभियान हस्तकला कारीगरों और श्रमिकों को अपनी बिक्री बढ़ाने और अपने व्यवसाय को बढ़ावा देने में मदद करेगा। पीएम मोदी द्वारा “Vocal for Local” के विचार को बढ़ावा देने के बाद, हर क्षेत्र स्थानीय व्यवसायों को बढ़ावा देने और आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है।


15. वित्त मंत्री ने आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज 4.0 की घोषणा की

12 नवंबर, 2020 को वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज 4.0 की घोषणा की।

मुख्य बिंदु

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के अनुसार, अक्टूबर 2020 में PMI 58.9 पर पहुंच गया, जो COVID-19 संकट से अर्थव्यवस्था की मजबूत रिकवरी का संकेत है। अक्टूबर, 2020 में ऊर्जा की खपत में वृद्धि अधिक रही।

आत्मनिर्भर भारत रोज़गार योजना

आत्मनिर्भर भारत रोज़गार योजना लॉन्च की जा रही है। यह COVID-19 रिकवरी चरण के दौरान रोजगार के नए अवसरों के सृजन को प्रोत्साहित करने में मदद करेगी। इस योजना के लाभार्थियों में ईपीएफओ पंजीकृत प्रतिष्ठानों के कर्मचारी शामिल हैं, जो 15,000 रुपये से कम मासिक वेतन पर कार्यरत्त थे।

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