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11 June 2020 Hindi Current Affairs


‘पर ड्राप मोर क्रॉप’ के लिए 4,000 करोड़ रुपये आवंटित किये गये

भारत सरकार ने वर्ष 2020-21 के लिए प्रधानमंत्री कृषि सिचाई योजना के प्रति ड्रॉप मोर क्रॉप के लिए 4,000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।

मुख्य बिंदु

भारत सरकार ने पर ड्राप मोर क्रॉप घटक को लागू करने के लिए धन आवंटित किया है और राज्य सरकारें लाभार्थियों की पहचान करेंगी। इसके साथ ही, भारत सरकार  ने विशेष नवाचारी परियोजनाओं को लागू करने के लिए नाबार्ड (नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट) के साथ 5,000 करोड़ रुपये के माइक्रो इरिगेशन फंड कॉर्पस के निर्माण की भी जानकारी दी है।

माइक्रो इरिगेशन फंड कॉर्पस

इस सूक्ष्म सिंचाई निधि का उपयोग संसाधन जुटाने और सूक्ष्म सिंचाई के विस्तार के लिए किया जायेगा। अब तक, सूक्ष्म सिंचाई निधि तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश राज्यों को जारी की गई है। तमिलनाडु के लिए 478.79 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं और आंध्र प्रदेश के लिए 616.14 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।

पर ड्राप मोर क्रॉप

प्रधानमंत्री कृषि सिचाई योजना की ‘पर ड्राप मोर क्रॉप’ स्प्रिंकलर और ड्रिप सिंचाई के माध्यम से जल उपयोग दक्षता पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य उर्वरक उपयोग, श्रम व्यय और लागत को कम करना भी है।


फिच रेटिंग्स ने अगले वित्त वर्ष में भारत की जीडीपी वृद्धि दर  9.5% रहने का अनुमान लगाया  

वैश्विक रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स ने अनुमान लगाया है कि भारत की अर्थव्यवस्था अगले वित्त वर्ष में 9.5 प्रतिशत की वृद्धि दर के साथ वापसी करेगी। इससे पहले, फिच रेटिंग ने अनुमान लगाया था कि अप्रैल 2020 से शुरू होने वाले चालू वित्त वर्ष में भारत की जीडीपी वृद्धि 5 प्रतिशत पर आ जाएगी। यह भी उजागर हुआ है कि 9.5% की वृद्धि तभी संभव है जब देश वित्तीय क्षेत्र के स्वास्थ्य में और गिरावट से बचता है।

फिच रेटिंग्स

फिच रेटिंग्स विश्व की तीन सबसे बड़ी रेटिंग एजेंसियों में से एक है, अन्य दो प्रमुख एजेंसियां मूड़ीज़ और स्टैण्डर्ड एंड पूअर्स हैं। इसका मुख्यालय अमेरिका के न्यूयॉर्क में स्थित है। इसका पूर्व स्वामित्व हेअर्स्ट कारपोरेशन के पास है। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी एक किस्म की कंपनी होती है जो क्रेडिट रेटिंग प्रदान करती है। यह ऋणी द्वारा समय पर ऋण के भुगतान अथवा डिफ़ॉल्ट की सम्भावना की योग्यता का अनुमान लगाती है।


उत्तराखंड में जैव विविधता पार्क खोला गया

उत्तराखंड राज्य ने हाल ही में हल्द्वानी में एक जैव विविधता पार्क खोला है क्योंकि राज्य की समृद्ध वनस्पति विरासत जलवायु परिवर्तन, आवास नुकसान, परिदृश्य अवक्रमण और विकास गतिविधियों से खतरों का सामना कर रही है।

मुख्य बिंदु

विश्व पर्यावरण दिवस पर इस पार्क की स्थापना की गई थी। उत्तराखंड राज्य जो जैव विविधता से समृद्ध है, निम्न कारणों से वनस्पतियों और जीवों को खो रहा है :

  • जलवायु परिवर्तन

  • निवास स्थान का विखंडन

  • आवास क्षरण

पृष्ठभूमि

राज्य में जैव विविधता के क्षरण का मुख्य कारण  देश के पहाड़ी क्षेत्रों में उत्पन्न होने वाले कुछ एक विशेष खाद्य उत्पादों की लोकप्रियता है। इन खाद्य पदार्थों को “सुपर फूड्स” कहा जाता है। हालांकि, पहाड़ियों को बागान में बदल दिया जाता है, परन्तु वनों के संरक्षण के लिए बहुत कम प्रयास किए जाते हैं।

स्थानीय भोजन पर प्रभाव

भारत के पहाड़ी क्षेत्रों में आने वाले नए बागान केवल व्यावसायिक रूप से लाभदायक खाद्य पदार्थों को महत्व दे रहे हैं। इससे स्थानीय खाद्य किस्मों को खतरा पैदा हो गया है।

पार्क के बारे में

पार्क में 40 विषयगत खंड हैं। इसमें फल, पौधे, खाने योग्य प्रजातियां, औषधीय और वाणिज्यिक महत्व के पौधे भी शामिल हैं। पार्क में ऐसे पौधे भी शामिल हैं जिनका धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व है।

पार्क में स्थानीय खाद्य किस्में भी शामिल हैं। इसमें मुख्य रूप से जंगली बेर जैसे काफल, घिंघरू, हिसालु और किल्मोरा शामिल हैं। ये जामुन प्राकृतिक रूप से जंगलों में उगते हैं और स्थानीय लोगों द्वारा इनका सेवन किया जाता है।



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